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वेद प्रथाह ज्ञान के भण्डार हैं । परन्तु मध्यकालीन भारतीय विद्वानों और उनका ही अनुकरण करते हुए पाश्चात्य एवं प्राज के विद्वानों ने मिथ्या वारणाओं के कारण अथवा स्वार्थतश वेदों के अशुद्ध ग्रथं किये हैं । परिणामस्वरूप वेदों पर से लोगों की आस्था समाप्त होने लग गई है । विज्ञ लेखक ने वेदों में ‘ सोम ‘ शब्द पर , जिसके विषय में भी काफी प्रम फैला हुआ है , प्रकाश डालने का प्रयास किया है । हमें विश्वास है कि इस पुस्तक के अध्ययन से पाठकों को वेदों के विषय में और अधिक जानने की उत्कण्ठा उत्पन्न होगी एवं प्रेरणा भी मिलेगी ।

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