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वैदिक वांग्मय में भाषा चिंतन Vedic Vangmay Men Bhasha Chintan
₹350.00
- By :Shri Shivnarayan shastri
- Subject :Vedic Vangmay Men Bhasha Chintan
Book Details:
- Author: Shri Shivnarayan shastri
Description
ऋषियों की दृष्टि में भाषा का महत्त्व : ऋग्वेद-संहिता के ऋषि जीवन में भाषा के महत्त्व से सुपरिचित हैं। उन्होंने अपने मन्त्रों में भाषा के व्यावहारिक और दार्शनिक महत्त्व का वणन यत्र-तत्र किया है। गृत्समद ऋषि इन्द्र से श्रेष्ठ घनों की कामना करते समय वाणी के माधुर्य (स्वागन) की कामना को नहीं भुला पाय है ।
१. इन्द्र, श्रष्ठानि द्रविणानि घेहि चित्ति दक्षस्य सु-भगत्वमस्मे ।
पोषं रयीणामरिष्टि तनूना, स्वाद्यानं वाचः, सु-दिनत्वमह्नाम् ।।२।२१।६। २. सक्तुपिय तितउना पुनन्तो यत्र धीरा मनसा वाचमक्रत । अत्रा सखायः सख्यानि जानते; भद्रेयां लक्ष्मीनि-हिताऽधि वाचि ।।१०।७१।२।। तुलना करें : मनः-पूता बदेवाचं, वस्त्र-पूतं पिबेज्जलम् ।
दृष्टि-पूतं क्षिपेत्पादं, शास्त्र-पूतं समाचरेत् ॥ ३. वाचं-वाचं जरितू रत्निनी कृतमुभा शंसं नासत्याऽवतं मम । १।१२।४।।
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