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श्रीकृष्ण चरित
संसार के महापुरुषों पर दृष्टिपात करने से विदित होता है कि प्रत्येक में कोई-न-कोई वैशिष्ट्य होता है। उनमें कोई धर्म-संस्कारक है तो कोई स्वराज्य-स्रष्टा, कोई परम निःस्पृह परिव्राद् है तो कोई विचक्षण राजनीतिज्ञ, परन्तु कोई ऐसा महामानव दृष्टिगोचर नहीं होता जिसमें इन विभिन्न आदर्शों की एक-साथ परिणति हुई हो।
भारत की पुण्यभूमि में द्वापर और कलि की संधि-बेला में जन्म लेनेवाले अकेले कृष्ण वासुदेव ही ऐसे पुरुष हैं जिनमें लोकादर्श की पूर्ण प्रतिष्ठा तथा आर्य-चरित्र की चरम उत्कर्षता दिखाई पड़ती है।
इस ग्रन्थ में विद्वान् लेखक ने परिश्रमपूर्वक खोज करके सभी प्रकार की विकृतियों की कुज्झटिकाओं से निकालकर महाभारत के आधार पर, श्रीकृष्ण का लोक कल्याणकारी रूप उपस्थित किया है।

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