मेरे पिता Mere Pita
₹100.00
- Author: Pandit Indra Vidyavachaspati
- Language: Hindi
- Pages: 160
- Edition: 2017
- Cover: Paperback
- ISBN: 9788170772088
- Weight: 180 Gms.
मेरे पिता (Mere Pita)
प्रस्तावना
मैं श्री इन्द्र विद्यावाचस्पति का अनुगृहीत हूँ कि उन्होंने मुझसे यह प्रस्तावना लिखने का आग्रह किया। मुझे प्रसन्नता तो यह होती है कि मुझे स्वामी श्रद्धानन्द जी को अंजलि देने का अवसर प्राप्त हुआ।
पिछले तीस वर्ष से भारतवर्ष बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है। नई घटनाओं की परम्परा ऐसी होती है कि स्वामी जी की महत्ता, उनके बलिदान की अपूर्वता, उनके पवित्र हृदय की आकांक्षाओं, जाति, धर्म और राष्ट्र की उनकी सेवा-भावना, साहित्यिक, सामाजिक और राजनीतिक विचारधाराओं और कार्यवाहियों का थोड़ा-सा विस्मरण हो गया है; किन्तु यदि भारत को महान् राष्ट्र होना है तो देश के विश्वकर्माओं का स्मरण नये जमाने के सामने लाना होगा। इसलिए यह आवश्यक है कि स्वामी जी के पवित्र जीवन, उन की सेवा-भावना, उन की वीरता और कार्यदक्षता को हम हमेशा स्मरण रखें।
जिस युग में स्वामी जी ने अपना कार्य किया, उस युग में जो निडर नेता थे, उनमें स्वामी जी अग्रगण्य थे। जो नेता उत्साही थे, उनमें स्वामी जी आगे थे। जिन महापुरुषों ने ऋषियों के जीवन पर अपनी जीवन-चर्या बनाई, उनमें भी स्वामी जी अग्रगण्य थे।
वह युग तो लोकमान्य तिलक, लाला लाजपतराय, श्री अरविन्द, पण्डित मदनमोहन मालवीय और गाँधी जी जैसे महापुरुषों का था। उनमें स्वामी जी का भी स्थान है। वे तो वीर की तरह रहे और शहीद की तरह चले गए तथा भारत के सामने एक आदर्श जीवन रख गए।
मुझे आशा है कि पितृ ऋण अदा करने के लिए श्री इन्द्र विद्यावाचस्पति ने जो स्नेहपूर्ण संस्मरण लिखे हैं, वे स्वामी जी की याद सजीवित रखेंगे।
– कन्हैयालाल मुंशी
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