पिङ्गलछन्दः सूत्रम् | Pingala Chhanda Sutra
₹150.00
Book Details:
- Author: Dr Vijaypal Vidyavaridhi
- Language: Sanskrit
- Publication: Ramlal Kapoor Trust
- Edition: 2026
- Cover: Paperback
- Weight: 200 Gms.
Description
पुस्तक का संक्षिप्त विवरण
संस्कृत साहित्य और वैदिक वाङ्मय में ‘छन्द शास्त्र’ का विशेष महत्व है। आचार्य पिङ्गल द्वारा रचित ‘छन्दःसूत्र’ भारतीय छन्दशास्त्र का सबसे प्राचीन और प्रामाणिक ग्रन्थ माना जाता है। रामलाल कपूर ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित यह संस्करण व्याकरण और छन्दशास्त्र के उद्भट विद्वान् डॉ. विजयपाल विद्यावारिधि द्वारा अत्यन्त श्रम और शोध के साथ सम्पादित किया गया है।
यह ग्रन्थ वैदिक एवं लौकिक दोनों प्रकार के छन्दों की संरचना, लक्षण और उनके प्रयोग को गहराई से समझने के लिए एक अप्रतिम मार्गदर्शिका है।
मुख्य विशेषताएँ
- शुद्ध एवं प्रामाणिक मूल पाठ: प्राचीन हस्तलेखों और प्रामाणिक पांडुलिपियों के गहन अध्ययन व तुलनात्मक विश्लेषण के बाद मूल सूत्रों का निर्धारण किया गया है।
- सरल एवं स्पष्ट हिन्दी व्याख्या: डॉ. विजयपाल विद्यावारिधि जी ने कठिन से कठिन सूत्रों और गण-विधानों को हिन्दी में अत्यन्त सहज और बोधगम्य भाषा में समझाया है।
- वैदिक एवं लौकिक छन्दों का समावेश: ग्रन्थ में वैदिक ऋचाओं के छन्दों (जैसे गायत्री, त्रिष्टुप, जगती आदि) के साथ-साथ लौकिक संस्कृत काव्य में प्रयुक्त छन्दों (जैसे अनुष्टुप्, वंशस्थ, मन्दाक्रान्ता आदि) के नियमों का विशद वर्णन है।
- गण-योजना और उदाहरण: प्रत्येक छन्द के लक्षण के साथ-साथ उसके उदाहरण और गण-गणना (लघु-गुरु विधान) को स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है।
- उच्च स्तरीय मुद्रण एवं शोध परक सम्पादन: रामलाल कपूर ट्रस्ट की उच्च शोध-परम्परा के अनुरूप इसका सम्पादन और मुद्रण गुणवत्तापूर्ण है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है?
- संस्कृत साहित्य के शोधार्थी एवं अध्येता: छन्दशास्त्र पर मौलिक और प्रामाणिक सामग्री चाहने वाले शोधकर्ताओं के लिए अनिवार्य ग्रन्थ।
- संस्कृत एवं हिन्दी के कवि व साहित्यकार: काव्य रचना में छन्द-नियमों और लयबद्धता का सही ज्ञान प्राप्त करने हेतु।
- प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थी: NET/JRF, असिस्टेंट प्रोफेसर, TGT/PGT (संस्कृत) तथा अन्य शास्त्रीय परीक्षाओं के लिए विशेष उपयोगी।
- भारतीय ज्ञान परम्परा के प्रेमी: जो प्राचीन भारतीय गणितीय व ध्वन्यात्मक छन्द प्रणाली को समझना चाहते हैं।
पुस्तक सार: यदि आप छन्द शास्त्र का गम्भीर, प्रामाणिक और वैज्ञानिक अध्ययन करना चाहते हैं, तो डॉ. विजयपाल विद्यावारिधि द्वारा सम्पादित यह ग्रन्थ आपके व्यक्तिगत एवं संस्थागत पुस्तकालय के लिए एक अमूल्य निधि है।
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