वेदों का महत्व Vedon ka Mahatva
₹150.00
- Author: Acharya Satyanand Naishthik
- Language: Hindi
- Pages: 140
- Edition: 2013
- Cover: Paperback
- Weight: 170 Gms.
In stock
वेद विषयक परम्परागत विश्वास
वेदों के विषय में आर्यों का यह परम्परागत विश्वास चला आ रहा है कि वे ईश्वरीय ज्ञान हैं। परम कारुणिक सर्वज्ञ भगवान् ने मनुष्यमात्र के कल्याणार्थ मानव सृष्टि के प्रारम्भ में यह पवित्र ज्ञान अग्नि, वायु, आदित्य और अङ्गिरा संज्ञक चार ऋषियों के पवित्रान्तःकरणों में प्रकाशित किया जिससे सब मनुष्यों को वैयक्तिक, पारिवारिक, सामाजिक, राष्ट्रीय तथा विश्व विषयक सब कर्त्तव्यों का यथार्थ ज्ञान प्राप्त हो सके और उसके द्वारा वे सुख, शान्ति तथा आनन्द को प्राप्त कर सकें। प्राचीन समस्त स्मृतिकार, दर्शन शास्त्रकार, उपनिषत्कार तथा रामायण, महाभारत, श्रौत-सूत्र, गृह्यसूत्रादि के लेखक यहां तक कि पुराणकार स्पष्टतया वेदों को ईश्वरीय तथा स्वतः प्रमाण और अन्य सब ग्रन्थों को परतः प्रमाण मानते हैं। उदाहरणार्थ मनु महाराज ने अपनी स्मृति में कहा है कि-
धर्म जिज्ञासमानानां, प्रमाणं परमं श्रुतिः ॥
अर्थात् जो धर्म का ज्ञान प्राप्त करना चाहते हैं उनके लिये परम प्रमाण वेद ही है।
वेदों को जो सर्वोच्च सम्मान भारतीय साहित्य, संस्कृति, सभ्यता में प्राप्त रहा है, वह अन्य किसी ग्रन्थ को प्राप्त नहीं हुआ। उसके अनेक कारण हैं जिनमें मुख्य तीन हैं-१. वेद ईश्वर द्वारा प्रदत्त ईश्वरीय ज्ञान है, अतः वह निर्भम और कल्याणकारी ज्ञान है। २. वेद समस्त सत्यविद्याओं का भण्डार है, अतः वह ज्ञान का भण्डार है। ३. वेदों में मनुष्य की उन्नति के लिए धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष का उपदेश है, जो मनुष्य के जीवन को सुखी-शान्त रखने के उपाय भी बताता है और मोक्ष के मार्ग पर ले जाता है। ये विशेषताएं किसी अन्य ग्रन्थ में नहीं हैं।
इन्हीं विशेषताओं के कारण वेदों का महत्त्व भी अपरम्पार है। इस छोटी-सी पुस्तिका में उसी महत्त्व से परिचित कराने के लिए अनेक छोटी-छोटी पुस्तकों और लेखों का संकलन करके इसको पाठकों के लिए पठनीय बनाया गया है।
वेदों के महंत्त्व-विषयक लेखों के सभी लेखक उच्च स्तर के वैदिक विद्वान् हैं और उन्होंने संक्षेप में महत्त्वपूर्ण सामग्री पाठकों के लिए उपलब्ध कराई है। आशा है पाठकगण इसका लाभ उठायेंगे और वेद-विषयक प्रामाणिक ज्ञान की वृद्धि करेंगे। इसका यह भी लाभ होगा कि इसको पढ़कर पाठकों की रुचि वेदों के प्रति बढ़ेगी और इस प्रकार उनमें वेदों के स्वाध्याय की रुचि भी जागृत होगी।
– आचार्य सत्यानन्द नैष्ठिक
Reviews
There are no reviews yet.