वैदिक वाङ्मय में पाप – पुण्य विमर्श
Vedic Vangmay men Pap – Punya Vimarsh

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Book Details:
  • Author: Dr. Jitendera Kumar
  • Language: Hindi
  • Pages: 347
  • Edition: 2023
  • Cover: Hard Cover
  • ISBN: 9788171106158
  • Weight: 545 Gms.
Description

वैदिक वाङ्मय में पाप – पुण्य विमर्श में वेदों और स्मृतियों के द्वारा पाप और पुण्य के विषय पर अनेक उपदेश समाहित हैं। श्रुति और स्मृति में सम्मिलित उपदेशों में, श्रुति को प्रमुख और स्वतः प्रमाण माना गया है। यदि किसी स्थिति में श्रुति और स्मृति में विरोध हो, तो श्रुति को ही प्रामाणिक माना जाता है।

मानव को अन्य प्राणियों की अपेक्षा बहुत अधिक सामाजिक प्राणी माना जाता है, और उसके लिए पाप-पुण्य का मानव समाज में महत्वपूर्ण असर होता है। इस विषय में यहाँ वैदिक साहित्य के सिद्धांतों को समझाने का प्रयास किया गया है।

यह पाठ पाप-पुण्य के विषय पर वैदिक साहित्य के महत्वपूर्ण उपदेशों का संग्रह है। इसका महत्व सिर्फ हमारी संस्कृति से ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका अनुप्रयोग समाज के हर क्षेत्र में देखा जा सकता है। अपने कर्मों के द्वारा हर व्यक्ति चाहता है कि उसका कर्म समाज में मान्य हो, लेकिन अगर समाज से उसको इस विषय में सहायता नहीं मिलती, तो वह शास्त्रों की ओर उत्तेजित होता है। इसलिए इस पाठ का शास्त्रीय दृष्टिकोण भी महत्वपूर्ण है।

इस पुस्तक के अध्ययन से पाप-पुण्य के विषय में भ्रांतियों का खुलासा होगा, जैसे कि किसी वस्त्र के स्पर्श से, किसी नाम के जाप से, या गंगा स्नान से सिर्फ पाप को धोने की धारणा। इसके अलावा, यह पुस्तक बताएगी कि किन-किन तत्वों से पाप का परिमार्जन या परिष्कार संभव है और क्या प्रायश्चित या पश्चात्ताप भी सम्भव है। इस पुस्तक में वेद, ब्राह्मण, उपनिषद्, स्मृतियाँ, और धर्मसूत्रों आदि से प्राप्त विचारों का संकलन है।

आशा है कि इस पुस्तक के अध्ययन से धर्मप्रेमी लोग बहुत लाभान्वित होंगे।

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