वैदिक संस्कृति के मूल तत्व
Vedic Sanskriti Ke Mool Tatva

200.00

Book Details:
  • Author: Dr. Satyavrat Siddhantalankar
  • Language: Hindi
  • Pages: 368
  • Edition: 2026
  • Cover: Paperback
  • ISBN: 9788199965850
  • Weight: 388 Gms.
Description

वैदिक-संस्कृति के मूल-तत्व
पुस्तक के बारे में

वैदिक-संस्कृति के विषय में बहिरंग दृष्टि से कई पुस्तकें लिखी गयी हैं। यह संस्कृति कब उत्पन्न हुई, कहाँ उत्पन्न हुई, ऐतिहासिक दृष्टि से कहाँ-कहाँ पहुँची ? हमने इस पुस्तक में अन्तरंग दृष्टि से विचार किया है। वैदिक संस्कृति की केन्द्रीय विचारधारा क्या है, इसके मूल तत्त्व क्या हैं. वैज्ञानिक तथा मनोवैज्ञानिक आधा क्या है, वर्तमान कालीन विचारधारा में उनका क्या स्थान है, भारत के ऋषि-मुनियों की जीवन के प्रति दृष्टि क्या थी, संस्कृति के जिन मूल-तत्त्वों का उन्होंने दर्शन किया था, उन्हें जीवन में क्रियात्मक तथा व्यावहारिक रूप किस प्रकार दिया था- इन्हीं सब बातों का इस पुस्तक में विवेचन करने का प्रयत्न किया गया है।

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About Dr. Satyavrat Siddhantalankar
प्रो० सत्यव्रत सिद्धान्तालंकार (Dr. Satyavrat Siddhantalankar) ने लगभग 40 विशाल ग्रन्थों की रचना की। ये पुस्तकें शिक्षा, मनोविज्ञान, समाजशास्त्र, सामाजिक चिन्तन, उपनिषद, संस्कार, वैदिक विचार, गीता, होम्योपैथी आदि विविध विषयों पर आधारित हैं। कुछ ग्रन्थ हिन्दी तथा अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध हैं। एक बार मोरारजी देसाई ने उनकी पुस्तकों को देखकर आश्चर्यपूर्वक कहा था-'क्या आपने एक पुस्तकालय ही लिख डाला है?' उनका जन्म 5 मार्च 1898 को लुधियाना में हुआ। मात्र 7 वर्ष की आयु में उनका प्रवेश गुरुकुल काङ्गड़ी में हुआ। उन्होंने वहीं से 'सिद्धान्तालंकार' की उपाधि विशिष्ट श्रेणी में प्राप्त की और आगे चलकर उसी संस्थान में प्राध्यापक तथा कुलपति बने। उनकी धर्मपत्नी श्रीमती चंद्रावती भी एक शिक्षाविद थीं। दोनों ही स्वतन्त्रता संग्राम में सक्रिय रहे और कारावास का कष्ट सहा। दोनों को राज्यसभा के लिए मनोनीत किया गया तथा अपने लेखन कार्य के लिए अनेक सम्मानों से अलंकृत किया गया। उनका दीर्घ कार्यकाल उच्च उपलब्धियों से परिपूर्ण रहा।
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