वैदिक-कोषः (विमर्शटीकया सहितः) Vaidik Kosh
₹2,500.00
- Author: Acharya Pradeep Kumar Shastri, Acharya Rajveer Shastri
- Language: Sanskrit
- Publication: Aarsh Sahitya Prachar Trust
- Pages: 1180
- Edition: 2026
- Cover: Hard Cover
- ISBN: 9788196947828
- Weight: 2126 Gms.
“वैदिक-कोष” की प्रमुख विशेषताएँ
(१) महर्षि दयानन्द ने जो वैदिक पदों के विशेष अर्थ किये हैं, जिनसे वेदों का सत्यार्थ विशेषरूप में आता है, उनको दिखाया गया है।
(२) वैदिक पदों की व्याख्या व्याकरण, निरुक्त तथा ब्राह्मण ग्रन्थों में ऋषियों ने स्पष्ट की है, उसको दिखाया गया है। यह कार्य गुरुकुल कांगड़ी के आचार्य पण्डित चमूपति ने वेदार्ष-कोष में प्रकाशित किया था। उसी शैली में इस वैदिक-कोष को देखकर विद्वद्गण बहुत प्रभावित हुए थे। मुझे स्वामी दीक्षानन्द जी ने यह बड़े हर्ष से कहा था कि आर्ष साहित्य प्रचार ट्रस्ट का यह अद्भुत प्रकाशन है। विद्वानों को यह अमूल्य ग्रन्थ सम्मानपूर्वक भेंट में भी लाला जी ने दिया था।
(३) वैदिक पदों के अर्थ जानने के लिए विशेषण-विशेष्य का जानना अत्यन्त आवश्यक होता है। और यह कार्य अत्यन्त दुरूह होने पर भी इस कोष के सहयोग से पाठकों के लिए बहुत सुबोध हो जायेगा। इससे पूर्व के सायणादि के भाष्यों में मन्त्रों में वर्णित रूपक, उपमा आदि अलङ्कारों का स्पष्टीकरण नहीं होता था, यह इस कोष के सहयोग से सुगम हो सकेगा।
(४) इसी प्रकार वैदिक पदों के सन्दिग्ध एवम् अस्पष्ट होने से पाठक सन्देह में रहता था कि मन्त्र में ईश्वर, जीवात्मा और प्रकृति का कहाँ-कहाँ वर्णन किया गया है। इस वैदिक कोष से यह सरल, सुगम हो सकेगा।
(५) महर्षि दयानन्द के वेदभाष्य में यह भी स्पष्ट होता है कि मन्त्र की व्याख्या निरुक्त ब्राह्मण आदि ग्रन्थों में कहाँ-कहाँ की है।
(६) इस वैदिक-कोष से यह भी स्पष्ट हो जायेगा कि अविद्या आदि पदों को समझने में आदि शंकराचार्य को जो भ्रान्ति हुई, वह प्रभु को न होगी जैसे ‘अव॑िद्यया मृत्युं ती॒र्ध्वा वि॒िद्यया॒मृत॑मश्नुते’ (यजुः ० ४०.१४) मन्त्र में अविद्या से मृत्यु को कैसे तर सकता है। इत्यादि बातें इस वैदिक कोष से जानी जा सकती हैं।
– राजवीर शास्त्री
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