उपनिषदों की कथाएँ Upnishadon Ki Kathayen
₹150.00
- Author: Dr. Bhavanilal Bharatiya
- Language: Hindi
- Pages: 145
- Edition: 2022
- Cover: Paperback
- ISBN: 9788170771638
- Weight: 170 Gms.
उपनिषदों की कथाएँ (Upnishadon Ki Kathayen)
उपनिषद् भारतीय आर्ष प्रज्ञा का महान् चमत्कार है। वेदों के पश्चात् प्रामाणिक माने जानेवाले ग्रन्थों में शीर्षस्थ है। वेदान्तवादी दार्शनिकों के लिए तो उनसे बढ़कर अन्य कोई प्रामाणिक ग्रन्थ है ही नहीं।
उपनिषदों के महत्त्व को बिना किसी साम्प्रदायिक भेदभाव के, सभी देशों, मतों तथा सम्प्रदायों के मनीषियों ने स्वीकार किया तथा उन्हें सार्वभौम मान्यता मिली। जर्मनी के प्रसिद्ध दार्शनिक शॉपनहार ने इनके बारे में लिखा था-संसार में उपनिषदों के अध्ययन के तुल्य लाभप्रद तथा आत्मा को ऊँचा उठानेवाला किसी अन्य ग्रन्थ का अध्ययन नहीं है।
आर्यसमाज में उपनिषदों को सदा से ही आदर मिलता रहा है। ऋषि दयानन्द ने अपने ग्रन्थों में उपनिषदों के शतशः उद्धरण दिये हैं तथा अपने दार्शनिक मत की पुष्टि में उन्हें भूरिशः उद्धृत किया है।
उपनिषत्कार प्रायः अपने सिद्धान्तों को स्पष्ट करने के लिए विभिन्न आख्यानों और कथाओं का सहारा लेते हैं। इन आख्यानों और कथाओं के द्वारा अध्यात्म जैसे गूढ़ विषय को स्पष्ट, सरल तथा बोधगम्य बनाने का उपनिषद् निर्माता ऋषियों का यह प्रयास निश्चय ही श्लाघनीय था।
अवशिष्ट कथाओं की यह सुबोध व्याख्या उपनिषद्गत अध्यात्म में रूचि रखनेवाले पाठकों के लिए प्रस्तुत है।
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