पुस्तक का नाम – उपनिषद् प्रकाश
लेखक – सत्यव्रत सिद्धान्तालङ्कार
प्रो.सत्यव्रत सिद्धांतालङ्कार जी ने गीता भाष्य के अतिरिक्त सभी उपनिषदों पर एक अन्य अद्वितीय ग्रन्थ लिखा हैं जिसका नाम है – “उपनिषद प्रकाश”। इस ग्रन्थ में सभी उपनिषदों की ऐसी सरल और सुगम हिंदी में व्याख्या है कि इसे पढने पर ऐसा लगता है जैसे किसी आध्यात्मिक गुरु से उपनिषद् के रहस्य की चर्चा सुन रहे हों। यह ग्रन्थ एकादशोपनिषद् का पूरक ग्रन्थ है। इसमें एकादशोपनिषद् में व्याख्यात् सभी उपनिषदों की गुत्थियों को खोल रखा है। यदि आप संस्कृत का ज्ञान नहीं रखते हैं तो भी ‘उपनिषद प्रकाश’ के स्वाध्याय से आप उपनिषदों के रहस्य समझ जायेंगे। इस ग्रन्थ को पढने का अनुभव आध्यात्मिक उपन्यास को पढ़ने जैसा होता है। एकादशोपनिषद् की तरह यह ग्रन्थ भी नित्य-स्वाध्याय का ग्रन्थ है। यह ग्रन्थ पाठकों को उपनिषद् गंगा में गोते लगाने का मार्ग सुगम करेगा।
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उपनिषद प्रकाश Upanashid Prakash
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| AUTHOR: | Dr. Satyavrat Siddhantalankar |
| SUBJECT: | Upnishada Sangrah |
| CATEGORY: | Upanishad |
| LANGUAGE: | Hindi |
| EDITION: | 2024 |
| PAGES: | 520 |
| BINDING: | Hard Cover |
| WEIGHT: | 1250 |
Book Details:
- Author: Dr. Satyavrat Siddhantalankar
- Language: Hindi, Sanskrit-Hindi
Description
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About Dr. Satyavrat Siddhantalankar
प्रो० सत्यव्रत सिद्धान्तालंकार (Dr. Satyavrat Siddhantalankar) ने लगभग 40 विशाल ग्रन्थों की रचना की। ये पुस्तकें शिक्षा, मनोविज्ञान, समाजशास्त्र, सामाजिक चिन्तन, उपनिषद, संस्कार, वैदिक विचार, गीता, होम्योपैथी आदि विविध विषयों पर आधारित हैं। कुछ ग्रन्थ हिन्दी तथा अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध हैं। एक बार मोरारजी देसाई ने उनकी पुस्तकों को देखकर आश्चर्यपूर्वक कहा था-'क्या आपने एक पुस्तकालय ही लिख डाला है?' उनका जन्म 5 मार्च 1898 को लुधियाना में हुआ। मात्र 7 वर्ष की आयु में उनका प्रवेश गुरुकुल काङ्गड़ी में हुआ। उन्होंने वहीं से 'सिद्धान्तालंकार' की उपाधि विशिष्ट श्रेणी में प्राप्त की और आगे चलकर उसी संस्थान में प्राध्यापक तथा कुलपति बने। उनकी धर्मपत्नी श्रीमती चंद्रावती भी एक शिक्षाविद थीं। दोनों ही स्वतन्त्रता संग्राम में सक्रिय रहे और कारावास का कष्ट सहा। दोनों को राज्यसभा के लिए मनोनीत किया गया तथा अपने लेखन कार्य के लिए अनेक सम्मानों से अलंकृत किया गया। उनका दीर्घ कार्यकाल उच्च उपलब्धियों से परिपूर्ण रहा।
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