सूर्य सिद्धांत व्याख्याकार उदय नारायण सिंह | Surya Siddhanta by Uday Narayan Singh
₹450.00
- Author: Uday Narayan Singh
- Language: Hindi, Sanskrit-Hindi
- Publication: Ramlal Kapoor Trust
- Pages: 245
- Edition: 2025
- Cover: Hard Cover
- Weight: 490 Gms.
सूर्य सिद्धांत व्याख्याकार उदय नारायण सिंह | Surya Siddhanta by Uday Narayan Singh
प्राक्कथन
वैदिक वाङ्मय एवं वैदिक धर्म सम्बन्धी ग्रन्थों के प्रकाशक श्री सावित्री देवी, बागड़िया ट्रस्ट (कलकत्ता) की ओर से श्री पं० उदयनारायसिंह लिखित सूर्यसिद्धान्त की आर्यभाषा व्याख्या प्रकाशित की जा रही है। यह व्याख्या अपनी बृहद् भूमिका के कारण अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। इस भूमिका में ज्योतिष शास्त्र सम्बन्धी अनेक घटनाओं के गूढ रहस्यों को न समझने के कारण लोक में जो विविध भ्रान्त धारणाएं व्याप्त हो गई हैं, उन का भी स्पष्टीकरण किया है।
श्री पं० उदयनारायणसिह ने ज्योतिष शास्त्र सम्बन्धी सिद्धान्त शिरोमणि और आर्यभट्टीय का भी आर्यभाषानुवाद किया। एवं दर्शनशास्त्र-सम्बन्धी सर्वदर्शन-संग्रह और न्यायवात्स्यायन भाष्य तथा अनेक गृह्यसूत्रों का भी भाषानुवाद प्रकाशित किया। इससे स्पष्ट है कि श्री पं० उदयनारायण सिंह जी वहुमुखी प्रतिभा के घनी थे। आप के सभी ग्रन्थ ‘शास्त्र-प्रकाश-कार्यालय’ विदूर, जिला मुजफ्फरपुर (बिहार) से प्रकाशित हुए थे।
ज्योतिष शास्त्र के अनेक सिद्धान्त ग्रन्थ थे। उन में पितामह-सिद्धान्तः बसिष्ठ-सिद्धान्त, रोमक-सिद्धान्त, पुलिश-सिद्धान्त और सूर्यसिद्धान्त ये पांच सिद्धान्त पन्थ प्राचीन माने जाते हैं। वर्तमान सूर्यसिद्धान्त मय नामक असुर द्वारा पुनः प्रोक्त अथवा संस्कृत है। भारतोय वाङ्मय में अनेक ऐसे प्राचीन प्रामाणिक आर्ष ग्रन्थ हैं, जिनका उत्तर काल में पुनः प्रवचन अथवा संस्करण हुआ, यथा अग्निवेश कृत तन्त्र का चरक और दृढबल ने तथा धन्वन्तरि-तन्त्र का सुश्रुत ने पुनः प्रवचन किया। संप्रति उक्त मुनियों एवं आचार्यों द्वारा संस्कृत ग्रन्थ ही उपलब्ध होते हैं। वर्तमान ज्योतिषशास्त्री एवं आर्ष ग्रन्यों के अन्यतम प्रचारक वर्तमान सूर्यसिद्धान्त को प्रामाणिक ग्रन्थ मानते हैं।
अनेक व्यक्तियों का कहना है कि वर्तमान सूर्यसिद्धान्त में प्राचीन ग्रन्थों में सूर्यसिद्धान्त के नाम से उद्युत वचन नहीं मिलते, अतः यह अप्रामाणिक ग्रन्थ है। हमारा इस विषय में इतना ही कहना है कि सूर्यसिद्धान्त के नाम से अन्य ग्रन्यों में उद्युत वचन मूल सूर्यसिद्धान्त में रहे होंगे। सूर्यसिद्धान्त के वर्तमान लघु-संस्करण के साथ मूल सूर्यसिद्धान्त बहुत समय तक प्रचलित रहा होगा।
वृद्ध सूर्य-सिद्धान्त का भी यत्र तत्र उल्लेख मिलता है, सम्भवतः उसका मूल सूर्यसिद्धान्त से सम्बन्ध हो अथवा सूर्यसिद्धान्त का कोई वृद्ध पाठ भी रहा हो। मनु अथवा वृद्ध मनु के नाम से प्राचीन ग्रन्थों में उद्धृत शतशः ऐसे श्लोक हैं जो वर्तमान में उप-लब्ध भृगुप्रोक्त मनुस्मृति (जिस का उत्तर काल में पुनः प्रवचन हुआ) में नहीं मिलते । ऐसा होने पर भी वर्तमान में उपलब्ध मनुस्मृति धर्मशास्त्र का प्रामाणिक ग्रन्थ माना जाता है। इसी प्रकार वर्तमान में उपलब्ध सूर्यसिद्धान्त के विषय में भी जानना चाहिये ।
युधिष्ठिर मीमांसक
पुस्तक का परिचय
सूर्य सिद्धांत, व्याख्याकार उदय नारायण सिंह द्वारा प्रस्तुत, भारतीय खगोल विज्ञान की प्राचीन ज्ञान-परंपरा को समझने के लिए एक महत्त्वपूर्ण ग्रंथ है। सूर्य सिद्धांत भारतीय खगोलशास्त्र की प्रसिद्ध रचनाओं में से एक है, जिसमें ग्रहों की गति, सूर्य एवं चंद्रमा की स्थिति, समय की गणना तथा खगोलीय घटनाओं के अध्ययन से संबंधित विषयों का विवेचन मिलता है।
यह ग्रंथ उन पाठकों के लिए विशेष रुचिकर है, जो प्राचीन भारतीय वैज्ञानिक चिंतन, खगोल गणना और पारंपरिक कालगणना की पद्धतियों को समझना चाहते हैं। उदय नारायण सिंह की व्याख्या पाठकों को इस प्राचीन ग्रंथ की विषय-वस्तु से परिचित होने और भारतीय खगोल विज्ञान की ऐतिहासिक परंपरा का अध्ययन करने में सहायता प्रदान करती है।
सूर्य सिद्धांत की प्रमुख विशेषताएँ
- प्राचीन भारतीय खगोल विज्ञान: भारतीय खगोलशास्त्र की समृद्ध परंपरा का परिचय।
- ग्रहों की गति एवं स्थिति: खगोलीय पिंडों की गति और स्थिति से संबंधित सिद्धांतों का अध्ययन।
- कालगणना: समय की गणना तथा पारंपरिक पंचांग निर्माण से संबंधित अवधारणाओं को समझने का अवसर।
- खगोलीय गणनाएँ: प्राचीन भारतीय गणितीय एवं खगोलीय पद्धतियों के अध्ययन में सहायक।
- व्याख्याकार: उदय नारायण सिंह।
यह पुस्तक किनके लिए उपयोगी है?
सूर्य सिद्धांत उन विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधार्थियों, इतिहासकारों और जिज्ञासु पाठकों के लिए उपयोगी हो सकती है, जो भारतीय खगोल विज्ञान, प्राचीन गणित, कालगणना और पारंपरिक खगोलीय सिद्धांतों में रुचि रखते हैं। भारतीय वैज्ञानिक विरासत और प्राचीन ज्ञान-विज्ञान का अध्ययन करने वाले पाठकों के लिए भी यह पुस्तक महत्त्वपूर्ण है।
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यदि आप प्राचीन भारतीय खगोल विज्ञान और उसकी गणितीय परंपरा का अध्ययन करना चाहते हैं, तो सूर्य सिद्धांत — व्याख्याकार उदय नारायण सिंह को अपने पुस्तक संग्रह में शामिल करें।


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