श्रीराम
Shriram

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  • By : Gurudutt
  • Subject : Shriram
  • Category : Hindu Scriptures
Book Details:
  • Author: Gurudutt

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Description

श्रीराम भगवान थे या परमात्मा का अवतार थे ?

या श्रीराम एक महापुरूप थे ?

हम कुछ भी मानें , इतना अवश्य है कि उन्होंने अपने जीवन में वह कार्य किया जो एक महान आत्मा ही कर सकता है ।

ऐसा क्या किया श्रीराम ने ?

यह तो हम जानते हैं कि उन्होंने दुष्ट राक्षसों और उनके राजा रावण का वध क्या राक्षस दुष्ट थे ?

क्या रावण इतना बुरा व्यक्ति था कि उसका वध करना रावण कौन था ?

राक्षस कौन थे ?

कहते हैं कि लाखों वर्ष पूर्व पृथ्वी पर प्रलय आई थी और सम्पूर्ण पृथ्वी ज में डूब गई थी । सब कुछ नष्ट हो गया था । केवल कुछ भाग , जो बहुत ऊँचे थे , जल से बाहर रह गये थे और वहाँ कुछ लोग बच गये थे । उस बची हुई भूमि में देवलोक भी था । ऐसी मान्यता है कि यह वही क्षेत्र था जिसे आजकल तिब्बत कहते हैं । देवताओं में एक वृद्ध तपस्वी ब्रह्मा थे जो उनके पितामह माने जाते थे । देवलोक का राजा इन्द्र था । देवलोक में सुख और शान्ति थी । लोग परिश्रम करते थे और उन्नति करते थे ।

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About Gurudutt
वैद्य गुरुदत्त, एक विज्ञान के छात्र और पेशे से वैद्य होने के बाद भी उन्होंने बीसवीं शताब्दी के एक सिद्धहस्त लेखक के रूप में अपना नाम कमाया। उन्होंने लगभग दो सौ उपन्यास, संस्मरण, जीवनचरित्र आदि लिखे थे। उनकी रचनाएं भारतीय इतिहास, धर्म, दर्शन, संस्कृति, विज्ञान, राजनीति और समाजशास्त्र के क्षेत्र में अनेक उल्लेखनीय शोध-कृतियों से भी भरी हुई थीं। तथापि, इतनी विपुल साहित्य रचनाओं के बाद भी, वैद्य गुरुदत्त को न कोई साहित्यिक अलंकरण मिला और न ही उनकी साहित्यिक रचनाओं को विचार-मंथन के लिए महत्व दिया गया। कांग्रेस, जवाहरलाल नेहरू और महात्मा गांधी के कटु आलोचक होने के कारण शासन-सत्ता ने वैद्य गुरुदत्त को निरंतर घोर उपेक्षा की। छद्म धर्मनिरपेक्ष इतिहासकारों ने भी उनको इतिहासकार ही नहीं माना। फलस्वरूप, आज भी वैद्य गुरुदत्त को जानने और पढ़ने वालों की संख्या काफी कम है
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