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श्रीमद् भगवद् गीता Shrimad Bhagwad Gita
₹425.00
Book Details:
- Author: Dr. Satyavrat Siddhantalankar
- Language: Sanskrit-Hindi
- Pages: 658
- Edition: 2024
- Cover: Hard Cover
- ISBN: 9788170773047
- Weight: 800 Gms.
Description
श्रीमद् भगवद् गीता (Shrimad Bhagwad Gita)
धारावाही हिंदी में सचित्र, मूल तथा शब्दार्थ सहित इस भाष्य की विशेषता यह है कि श्लोक बड़े अक्षरों में दिए गए हैं। उसके नीचे प्रत्येक संस्कृत शब्द का हिंदी अर्थ दिया गया है। और प्रत्येक अध्याय के पीछे सारे अध्याय का दार्शनिक विवेचन किया गया है।
गीता पर विभिन्न टीकाकारों का मत देने के साथ-साथ लेखक ने अपने वैज्ञानिक दृष्टिकोण से गीता की विचारधारा पर गहराई से विवेचन किया है। गीता को पढ़ते हुए पाठक के हृदय में अनेक प्रश्न उठते हैं। निष्काम कर्म क्या है? वर्ण व्यवस्था का वास्तविक रूप क्या है? अवतारवाद क्या है? सत्य-रज-तम क्या हैं? श्री कृष्ण का अपना विशाल रूप दर्शाने का क्या अभिप्राय है?
इन सब समस्याओं का हल इस पुस्तक को पढ़ने से अपने आप समझ आ जाता है।
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About Dr. Satyavrat Siddhantalankar
प्रो० सत्यव्रत सिद्धान्तालंकार (Dr. Satyavrat Siddhantalankar) ने लगभग 40 विशाल ग्रन्थों की रचना की। ये पुस्तकें शिक्षा, मनोविज्ञान, समाजशास्त्र, सामाजिक चिन्तन, उपनिषद, संस्कार, वैदिक विचार, गीता, होम्योपैथी आदि विविध विषयों पर आधारित हैं। कुछ ग्रन्थ हिन्दी तथा अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध हैं। एक बार मोरारजी देसाई ने उनकी पुस्तकों को देखकर आश्चर्यपूर्वक कहा था-'क्या आपने एक पुस्तकालय ही लिख डाला है?' उनका जन्म 5 मार्च 1898 को लुधियाना में हुआ। मात्र 7 वर्ष की आयु में उनका प्रवेश गुरुकुल काङ्गड़ी में हुआ। उन्होंने वहीं से 'सिद्धान्तालंकार' की उपाधि विशिष्ट श्रेणी में प्राप्त की और आगे चलकर उसी संस्थान में प्राध्यापक तथा कुलपति बने। उनकी धर्मपत्नी श्रीमती चंद्रावती भी एक शिक्षाविद थीं। दोनों ही स्वतन्त्रता संग्राम में सक्रिय रहे और कारावास का कष्ट सहा। दोनों को राज्यसभा के लिए मनोनीत किया गया तथा अपने लेखन कार्य के लिए अनेक सम्मानों से अलंकृत किया गया। उनका दीर्घ कार्यकाल उच्च उपलब्धियों से परिपूर्ण रहा।
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