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सत्यार्थ प्रकाश Satyarth Prakash
₹80.00
| AUTHOR: | Swami Dayanand Sarswati |
| SUBJECT: | सत्यार्थ प्रकाश – Satyarth Prakash |
| CATEGORY: | Swami Dayanand Granth |
| LANGUAGE: | HINDI |
| EDITION: | 2024 |
| ISBN: | 9788170772163 |
| PAGES: | 512 |
| WEIGHT | 430 GM |
“राष्ट्र के लिए उपयोगी सत्यार्थ प्रकाश”
स्वामी दयानंद सरस्वती रचित सत्यार्थ प्रकाश केवल एक धार्मिक ग्रंथ ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय जागरण और सामाजिक सुधार का महान ग्रंथ है। यह पुस्तक भारतवर्ष के लिए इतनी उपयोगी है कि इसे “भारतीय पुनर्जागरण का घोषणापत्र” भी कहा जाता है। इसके राष्ट्रहितकारी पहलुओं को निम्न प्रकार समझा जा सकता है—
1. सत्य और तर्क का आधार
सत्यार्थ प्रकाश ने अंधविश्वास, पाखंड और रूढ़ियों को तोड़कर समाज को सत्य और तर्क के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। इससे राष्ट्र के नागरिक विवेकशील, निर्भीक और आत्मनिर्भर बन सकते हैं।
2. शिक्षा का महत्व
स्वामी दयानंद ने स्त्री और पुरुष दोनों के लिए शिक्षा को अनिवार्य बताया। शिक्षित समाज ही राष्ट्र की शक्ति है। इस ग्रंथ ने शिक्षा को राष्ट्रनिर्माण का मूल आधार घोषित किया।
3. सामाजिक समानता और एकता
जातिवाद और ऊँच-नीच के भेदभाव का खंडन करके दयानंद जी ने समता आधारित समाज का संदेश दिया। यह राष्ट्रीय एकता के लिए अत्यंत उपयोगी है।
4. स्वदेशी और आत्मनिर्भरता
सत्यार्थ प्रकाश में स्वामी दयानंद ने विदेशी शासन और परतंत्रता से मुक्ति के लिए स्वदेशी और स्वावलंबन पर बल दिया। यह विचार आगे चलकर स्वतंत्रता आंदोलन का आधार बना।
5. स्त्री उत्थान और राष्ट्रनिर्माण
स्त्रियों को शिक्षा, सम्मान और समान अधिकार देने की प्रेरणा भी सत्यार्थ प्रकाश से मिलती है। राष्ट्र तभी सशक्त होगा जब उसकी माताएँ और बहनें जागृत होंगी।
6. धर्म और राष्ट्र का संबंध
दयानंद जी ने धर्म को केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं माना, बल्कि इसे राष्ट्रहितकारी आचार और कर्तव्य पालन से जोड़ा। सच्चा धर्म वही है जो राष्ट्र की उन्नति में सहायक हो।
7. वैदिक संस्कृति का पुनर्जागरण
सत्यार्थ प्रकाश ने भारतीय समाज को उसकी वैदिक जड़ों से जोड़कर आत्मगौरव और आत्मविश्वास प्रदान किया। इसने राष्ट्र को अपनी खोई हुई पहचान लौटाई।
| Weight | 430 g |
|---|---|
| Author | Swami Dayanand Sarswati |
| Language | Hindi |

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