संस्कार चन्द्रिका
Sanskar Chandrika

375.00

Book Details:
  • Author: Dr. Satyavrat Siddhantalankar
  • Language: Hindi
  • Pages: 568
  • Edition: 2025
  • Cover: Hard Cover
  • ISBN: 9788170773061
  • Weight: 710 Gms.
Description

संस्कार चन्द्रिका  (Sanskar Chandrika)

संस्कार-विधि महर्षि दयानंद की व्यवहारिक विचारधारा अर्थात् क्रियात्मक पक्ष है। इस सूत्र को लेकर हमने इस ग्रंथ में संस्कार-विधि की व्याख्या की है।

इस व्याख्या-ग्रंथ का लक्ष्य संस्कार-विधि की आत्मा को समझने का प्रयत्न करना है। इसलिए इसे संस्कार-विधि की वैज्ञानिक व्याख्या कहा है।

हमने प्रत्येक संस्कार को दो भागों में बाँटा है।

विवेचनात्मक भाग तथा मंत्र अर्थ सहित विधि भाग। विवेचनात्मक भाग में उस संस्कार के संबंध में वैज्ञानिक, मनोवैज्ञानिक तथा दार्शनिक दृष्टि से विचार किया गया है। विधि भाग में संस्कार की विधि को भिन्न-भिन्न शीर्षक देकर स्पष्ट तथा सरल रूप में लिखा गया है, ताकि संस्कार कराते हुए कोई कठिनाई न आए।

आईए संस्कार-विधि की इस वैज्ञानिक, व्यवहारिक व्याख्या का रसास्वादन करें।

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Sanskar Chandrika”

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About Dr. Satyavrat Siddhantalankar
प्रो० सत्यव्रत सिद्धान्तालंकार (Dr. Satyavrat Siddhantalankar) ने लगभग 40 विशाल ग्रन्थों की रचना की। ये पुस्तकें शिक्षा, मनोविज्ञान, समाजशास्त्र, सामाजिक चिन्तन, उपनिषद, संस्कार, वैदिक विचार, गीता, होम्योपैथी आदि विविध विषयों पर आधारित हैं। कुछ ग्रन्थ हिन्दी तथा अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध हैं। एक बार मोरारजी देसाई ने उनकी पुस्तकों को देखकर आश्चर्यपूर्वक कहा था-'क्या आपने एक पुस्तकालय ही लिख डाला है?' उनका जन्म 5 मार्च 1898 को लुधियाना में हुआ। मात्र 7 वर्ष की आयु में उनका प्रवेश गुरुकुल काङ्गड़ी में हुआ। उन्होंने वहीं से 'सिद्धान्तालंकार' की उपाधि विशिष्ट श्रेणी में प्राप्त की और आगे चलकर उसी संस्थान में प्राध्यापक तथा कुलपति बने। उनकी धर्मपत्नी श्रीमती चंद्रावती भी एक शिक्षाविद थीं। दोनों ही स्वतन्त्रता संग्राम में सक्रिय रहे और कारावास का कष्ट सहा। दोनों को राज्यसभा के लिए मनोनीत किया गया तथा अपने लेखन कार्य के लिए अनेक सम्मानों से अलंकृत किया गया। उनका दीर्घ कार्यकाल उच्च उपलब्धियों से परिपूर्ण रहा।
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