सांख्य दर्शन (सांख्य-योग समन्वयात्मक व्याख्या)
Sankhya Darshan

550.00

Book Details:
  • Author: Satish Arya
  • Language: Hindi, Sanskrit-Hindi
  • Pages: 300
  • Edition: 2025
  • Cover: Hard Cover
  • ISBN: 9788171109401
  • Weight: 750 Gms.
Description

प्रस्तुत सांख्य भाष्य की विशेषताएँ

यह कृति सांख्यसूत्रों की व्याख्या है। सांख्यदर्शन मोक्षप्राप्ति के सिद्धान्त पक्ष की व्याख्या करता है, अर्थात् विवेक ज्ञान की प्राप्ति को मोक्ष का एक मात्र उपाय बताता है; तथा योगदर्शन में उस विवेकज्ञान विवेकख्याति को प्राप्त करने के क्रियात्मक पक्ष की व्याख्या करता है। अतः दोनों दर्शन न केवल एक दूसरे के पूरक है, बल्कि ये दोनों मिलकर मुमुक्षु के लिए मोक्ष का सम्पूर्ण मार्ग की प्रस्तुत करते हैं। इस भाष्य की विशेषताएँ इस प्रकार हैं:-

1. सांख्यसूत्रों का शब्दशः अनुवाद।

2. सूत्रों पर महर्षि दयानन्द सरस्वती के ग्रन्थों में उपलब्ध अर्थों / विचारों का, सूत्रों के साथ प्रस्तुतिकरण। 19 सूत्रों पर ऋषि दयानन्द के सत्यार्थप्रकाश और ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका में किए गए अर्थ दिये गये हैं।

3. सूत्रों पर महर्षि कपिल के मन्तव्य की अन्तःसाक्षी के अनुकूल “वैदिक मीमांसा” नामक आर्य हिन्दी भाषा में व्याख्या। 85 सूत्रों की व्याख्या में सांख्यसूत्रों की अन्तःसाक्षी अथवा सन्दर्भ दिया गया है।

4. 119 सूत्रों पर योगदर्शन और व्यासभाष्य के 184 प्रमाण; जो सांख्य और योगदर्शन के समन्वय को समझने में परम सहायक हैं।

5. “वैदिक मीमांसा” में आवश्यक स्थलों में, सूत्रों में व्याख्यात विषयों का, वेद तथा वेदानुकूल ग्रन्थों के प्रमाणों द्वारा प्रतिपादन। 278 सूत्रों पर 84 प्रमाण वेदों से, 184 योगदर्शन से, 32 अन्य दर्शनों से, १३० उपनिषदों से, 13 महाभारत से, 13 मनुस्मृति से, तथा 30 प्रमाण अन्य ग्रंथों से प्रस्तुत किये गये हैं।

6. चतुर्थ अध्याय में दिए गए कथानकों को महाभारत से प्रमाण सहित प्रस्तुत किया गया है।

7. विभित्र भाष्यकारों द्वारा तथाकथित 75 प्रक्षिप्त सूत्रों की वेदानुकूल ग्रन्थों के सिद्धान्तों के अनुकूल युक्तियुक्त व्याख्या, तथा इनके वास्तविक अभिप्राय का स्पष्टीकरण।

8. प्रस्तुत “वैदिकमीमांसा” में, वेद तथा वेदानुकूल ग्रन्थों में प्रतिपादित सत्य सिद्धान्तों के अनुकूल तथा प्रामाणिक युक्तियुक्त व्याख्या।

इस प्रकार, यह एकमात्र भाष्य है जो न केवल कपिल के वास्तविक सिद्धान्तों को स्पष्ट करता है, बल्कि वैदिक युग के विभिन्न प्राचीन ऋषियों के सिद्धांतों के अनुसार भी है।

स्वामी दयानंद ने दर्शनों को परतः प्रमाण की श्रेणी में कहा है, और इन दर्शनों में किसी प्रक्षेप का नाम लेकर उल्लेख नहीं किया, और न ही इनमें इसमें किसी भी युगोत्तर मिश्रण का उल्लेख नहीं किया था। महर्षि कपिल द्वारा उपदिष्ट सूत्र पूर्णतया शास्त्रानुकूल हैं, और मानव जाति के लिए मोक्ष प्राप्त करने का आधार हैं। इन सिद्धांतों के आधार पर, सूत्रों पर वैदिकमीमांसा लिखी गयी है, जो पूरी तरह से वेदों और वैदिक शास्त्रों के सिद्धांतों के अनुसार है।

Reviews (0)

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “सांख्य दर्शन (सांख्य-योग समन्वयात्मक व्याख्या)
Sankhya Darshan”

Your email address will not be published. Required fields are marked *


Shipping & Delivery