सनातन को जानें Sanatan ko janen
₹150.00
- Author: Dr. Vivek Arya
- Language: Hindi
- Publication: Bharatiya Hindu Shuddhi Sabha
- Pages: 170
- Edition: 2026
- Cover: Paperback
- Weight: 210 Gms.
सनातन को जानें भूमिका
(क्या सनातन धर्म मलेरिया, डेंगू या कोरोना हैं, जिसे मिटा देना चाहिए?)
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के स्टालिन के पुत्र उदयनिधि स्टालिन ने एक सार्वजानिक सभा में बयान दिया कि सनातन धर्म मलेरिया, डेंगू या कोरोना हैं, उसे मिटा देना चाहिए। स्टालिन के इस बयान की चारों ओर से आलोचना हुई। सनातन धर्म के मूल अर्थ को समझकर केवल भड़काऊ राजनीति करने वाले नेता ऐसी बयानबाजी कर चंद वोट या सुर्खियां तो बटोर लेते हैं। पर उनके इस बयान से जो हानि होती हैं उसकी संभवतः कभी पूर्ति नहीं होती। स्टालिन के बयान के प्रभाव को समझें। युवा पीढ़ी इन बयानों से भ्रमित होकर देखा-देखी आलोचना कर सामाजिक परिवेश को प्रदूषित करने लग जाती हैं। इससे न केवल सामजिक एकता भंग होती हैं, अपितु धर्म के मार्ग से विहीन होकर युवा भटक कर भोग मार्ग पर चल पड़ते हैं। हमारे देश में आजकल अनेक समूह अपने राजनीतिक हितों को साधने के लिए एक्टिविज्म, जातिवादी, सामाजिक, नास्तिक, दलित, साम्यवादी, प्रगतिशील, अन्धविश्वास उन्मूलन आदि अनेक नामों से संस्थाएं बनाकर इसी नीति का अनुसरण कर रहे हैं। ये संगठित गुट कॉलेज या विश्वविद्यालयों में प्रवेश करने वाले युवाओं के समक्ष अपने आपको एक आदर्श, क्रांतिकारी, समाज हित में कार्य करने वाली संस्था के रूप में प्रदर्शित करते हैं। इनकी कार्यप्रणाली एक ही समान हैं। ‘युवाओं को भड़काओ और अपना राजनीतिक उल्लू सीधा करो।’ इनका कार्य करने का तरीका इतना संगठित और सुव्यवस्थित है कि युवा आसानी से इनके झांसे में आकर अपने ही पूर्वजों के धर्म की आलोचना करना आरम्भ कर देते हैं। अपनी भरी जवानी और अकादमिक शिक्षा के वर्ष गवांकर, सब कुछ खोकर उन्हें देर से समझ आता है कि उनके साथ कितनी बडी ठगी हई हैं। इसलिए बाद में न पछताना पड़े इसलिए ‘सनातन’ को समझना अत्यंत आवश्यक है।
युवाओं के झांसे में आने के मुख्य कारण निम्न हैं-
1. सनातन धर्म के मुलभूत सिद्धांतों से प्रचारकों की अनभिज्ञता।
2. धर्म समर्थक लोगों के पुरुषार्थ, सहयोग और प्रचार में कमी।
3. धर्म समर्थक लोगों का असंगठित, एकल, अल्प, कम प्रभावी, गैर संरक्षित प्रयास ।
4. देश के अनेक विश्वविद्यालयों में दशकों से सरकारी संरक्षण में स्थापित दुष्प्रचार तंत्र।
5. विदेशों एवं स्थानीय सुनियोजित तंत्र से आर्थिक हितों की रक्षा।
6. धर्म विरोधियों को आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक तथा न्याय प्रणाली की सुरक्षा एवं सहयोग।
इन चुनौतियों का सामना करने के लिए सुनियोजित प्रयास की आवश्यकता है। यह पुस्तक इस प्रयास का प्रथम कदम है। जिसके द्वारा बौद्धिक रूप से इस षड्यंत्र को यथोचित प्रत्युत्तर दिया जायेगा। इस पुस्तक को पढ़कर युवा जागृत होंगे और सनातन धर्म का प्रचार करें। यही इस पुस्तक को लिखने का उद्देश्य है। इस पुस्तक के लेखन एवं संपादन में श्री संजय कुमार, श्री कार्तिक अय्यर, श्री प्रियांशु सेठ का जो सहयोग मिला, मैं उनके लिए आभारी हूँ। जातिवाद मुक्त वेदों की शिक्षा पर चलने वाला भारत ही विश्वगुरु बन सकता है।
डॉ. विवेक आर्य
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