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साधना से सृजन Sadhana Se Srijan
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| AUTHOR: | Soma Nair ‘Som’ (सोमा नायर ‘सोम’) |
| SUBJECT: | Sadhana Se Srijan | साधना से सृजन |
| CATEGORY: | Biography |
| LANGUAGE: | Hindi |
| EDITION: | 2022 |
| PAGES: | 307 |
| ISBN: | 9789395287562 |
| PACKING: | Paperback |
| WEIGHT: | 655 g. |
आचार्यजी की कलम से
‘ईश्वर सबको किसी न किसी कार्य के लिए चुनते हैं और उसको पूरा करने का सामर्थ्य भी देते हैं। अगर हम उनकी आवाज को अनसुना कर देते हैं, तो ईश्वर हमसे वह शक्ति छीन लेते हैं। प्रकृति अपनी व्यवस्था चलाये रखने के लिए वह शक्ति किसी दूसरे को दे देती है। इसलिए हमें अपनी शक्तियों को पहचानना चाहिए और साधन हीनता और विपरीत परिस्थितियों की दुहाई दिए बिना कार्य करते रहना चाहिए।’
‘चाहे मुझे एक कमरे में रहना हो, कोई भी सुख-सुविधा न हो, मैं कुछ ऐसा करता रहूँगा, जिससे मेरे देश, मेरे समाज का हित हो और जो भावी पीढ़ियों के काम आ सके।’
‘आज सारा का सारा तनाव एक गलत सोच, एक ‘रॉग थॉट पैटर्न’ से आ रहा है। केवल अपने बारे में सोचने से, मांगने से, इच्छा रखने से, दूसरों पर हावी होने से अगर मानसिक तनाव उत्पन्न हो रहा है, तो हमें बदलना होगा। सोचने का क्रम बदलना होगा। ऑर्डर रिवर्स करना होगा। सभी को जीने के अवसर देना प्रकृति का नियम है।’
‘कर्म का एक स्पष्ट-सा सिद्धांत है। उसका फल अवश्य मिलता है। ऐसा नहीं हो सकता कि हम कर्म करें और वो व्यर्थ चला जाये। यह अच्छे या बुरे दोनों प्रकार के कर्मों पर लागू होता है। यह पुरुषार्थ और प्रमाद दोनों पर लागू होता है अर्थात् अगर पुरुषार्थ करेंगे, तो पुरुषार्थ और प्रमाद करेंगे तो प्रमाद का फल अवश्य मिलेगा।’
आचार्य बालकृष्ण
| Weight | 655 g |
|---|---|
| Author | Soma Nair ‘Som’ |
| Language | Hindi |

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