राजर्षि मनु और उनकी मनुस्मृति Rajrishi Manu aur unki Manusmriti
₹250.00
- Author: Dr. Surendra Kumar
- Language: Hindi
- Pages: 280
- Edition: 2022
- Cover: Hard Cover
- ISBN: 9788170771250
- Weight: 400 Gms.
राजर्षि मनु भारतीय सास्कृतिक गगन में हमारे दीपस्तम्भ हैं। भारतीय समाज का ढाँचा उन्हीं के अमर बीजमन्त्रों पर टिका हुआ है। उनकी विचारधारा गुण-कर्म-योग्यता के श्रेष्ठ मूल्यों के महत्व पर आधारित है।
‘राजर्षि मनु और उनकी मनुस्मृति’ शीर्षक यह मुक्ताहार पाठकों के हाथों में सौंपते हुए हमें पर्याप्त प्रसन्नता का अनुभव हो रहा है। इसके तीन कारण हैं-एक, इस विषय के विशेषज्ञ अनेक वैदिक विद्वानों के लेख इसमें ऐसे संकलित हैं जैसे किसी हार में मोतियाँ पिरोई होती हैं। इन विद्वानों के मनु और मनुस्मृति-सम्बन्धी चिन्तन से पाठक लाभान्वित हो सकेंगे। दूसरा, यह पुस्तक मनु और मनुस्मृति-विषयक भ्रान्तियों को दूर करने में सहायक सिद्ध होगी तथा उन भ्रान्तियों के विस्तार को रोकेगी। तीसरा, एक ही स्थान पर, एक विषय पर, अनेक विचारकों के विचार एकत्र मिलना कठिन होता है। सबको सब पुस्तकें उपलब्ध नहीं हो पातीं, अतः अध्ययन-मनन में पाठकों को सुविधा-लाभ होगा।
भारत के ही नहीं, अपितु मानव जाति के गौरव रूप महापुरुष, आदिराजा, विश्व के आदि संविधान निर्माता, आदि धर्मशास्त्रकार और मानवों के आदि-प्रमुख-पुरुष महर्षि मनु के विषय में फैलाई जा रही भ्रान्तियों पर विराम लगाने तथा मनु की प्रतिष्ठा की रक्षा हेतु यह विनम्र प्रयास है।
प्रणेता: स्वामी दीक्षानन्द सरस्वती
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