परिचय वैदिक भौतिकी Parichaya Vedic Bhautiki
₹700.00
- Author: Vishal Arya
- Language: Hindi, Sanskrit-Hindi
- Pages: 218
- Edition: 2021
- Cover: Hard Cover
- ISBN: 9788195013388
- Weight: 582 Gms.
परिचय वैदिक भौतिकी (Parichaya Vedic Bhautiki)
प्रस्तावना
इस पुस्तक को लिखने का मेरा उद्देश्य, मेरे प्यारे आर्यावर्त ही नहीं, अपितु संसार भर की युवा पीढ़ी, जो हमारा भविष्य है, को सृष्टि के प्रारम्भ से चले आ रहे तथा जिसको हमारे ऋषि मुनियों ने आविष्कृत किया एवं सुरक्षित रखा, उस वैदिक भौतिक विज्ञान से परिचय कराना है।
इस पुस्तक को मैंने वेदविज्ञान-आलोकः ग्रन्थ, जो ऋग्वेद के ब्राह्मण ग्रन्थ ऐतरेय ब्राह्मण (लगभग, सात हजार साल पुराना ग्रन्थ) का वैज्ञानिक भाष्य है तथा जिसे पूज्य गुरुवर आचार्य अग्निव्रत नैष्ठिक जी ने दस वर्षों के कठिन परिश्रम के पश्चात् लिखा है, के आधार पर लिखा है। इस ग्रन्थ का विषय सृष्टि उत्पत्ति है। इसमें प्रकृति अर्थात् सृष्टि की मूल अवस्था से लेकर तारों तक के बनने का विज्ञान है।
प्रायः विद्यार्थी भौतिक विज्ञान पढ़ने से डरते हैं, क्योंकि उनको गणित की जटिलताएँ कठिन प्रतीत होती हैं। इस कारण वर्तमान समय में गणित विद्या से विहीन छात्र, जो भले ही प्रतिभाशाली है और सृष्टि को समझने की उत्कट इच्छा रखते हैं, भौतिक विज्ञान नहीं पढ़ पाते। यह पाश्चात्य पद्धति का बहुत बड़ा दोष है। इधर हमारी वैदिक भौतिकी की इस पुस्तक को पढ़कर गणित से अनजान परन्तु तर्क और प्रतिभा से युक्त छात्र भी सृष्टि को उस गहराई तक समझ सकते हैं, जहाँ तक पाश्चात्य भौतिकी को पहुँचने में सदियाँ लग सकती हैं। वस्तुतः विज्ञान तो एक ही है, जो सब देशों और सब कालों में सबको एक ही मानने योग्य है परन्तु मानव के सामर्थ्य के अनुसार और भिन्न-भिन्न कालों में इसकी व्याख्या भिन्न-भिन्न प्रकार से की जाती रही है, इसी कारण हम इस पुस्तक में इसे पाश्चात्य अथवा वैदिक नाम से सम्बोधित कर रहे हैं।
कोई पाठक इस पुस्तक को पढ़कर यह न समझे कि वैदिक भौतिकी का विस्तार इतना ही है। जिनको अधिक विस्तार से जानने की इच्छा है, उन्हें वेदविज्ञान-आलोकः पढ़ना चाहिए। इसके उपरान्त यह कहना भी सत्य है कि वेदविज्ञान-आलोकः भी सम्पूर्ण सृष्टि की सम्पूर्ण व्याख्या नहीं करता है, क्योंकि कोई भी मनुष्य अपने में पूर्ण नहीं होता। वैदिक भौतिकी के अनेक शास्त्र विद्यमान हैं, परन्तु उन पर वैज्ञानिक ढंग से व्याख्या करना अभी शेष है। इस कारण इस समय इस पुस्तक और वेदविज्ञान-आलोकः को पढ़कर पाठक इतना ज्ञान तो प्राप्त कर ही सकते हैं, जो उन्हें वर्तमान भौतिकी की सीमा से बहुत आगे तक ले जा सकता है। आप हमारे यूट्यूब चैनल वैदिक फिजिक्स पर वेदविज्ञान-आलोकः कक्षा नाम से प्ले-लिस्ट है, जिसमें अनेकों वीडियोस् है, को भी देख सकते हैं। भविष्य में भी हम इन विषयों के ऊपर वीडियो बनाते रहेंगे।
अन्त में मैं अपने प्रतिभाशाली पाठकों से आग्रह करूँगा कि वे इस पुस्तक को निष्पक्षता एवं ध्यानपूर्वक पढ़कर, इसके आधार पर गणित और इसके आधार पर होने वाले प्रयोगों का विकास करने का प्रयत्न करें, साथ ही शनैः शनैः इसके आधार पर तकनीक विकसित करने की सम्भावनाओं का भी पता लगाने का प्रयास करें। हम सबको मिलकर ही इस महान् वैदिक विज्ञान को मानवमात्र के सुख के लिए संसार में प्रतिष्ठित करना है। क्योंकि इसमें संसार की लगभग सभी गम्भीर समस्याओं का समाधान विद्यमान है।
नोट : यदि पाठक इस पुस्तक का पूर्णतः लाभ लेना चाहते हैं, तो उन्हें अध्याय के अन्त में दिये अभ्यास के प्रश्नों के उत्तर एवं क्रियाकलाप करने का प्रयास करना चाहिए।
– विशाल आर्य
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