पातञ्जल योगदर्शन (व्यासभाष्य एवं भोजवृत्ति सहित) Paatanjal Yogdarshan (including Vyasbhashya and Bhojavritti)
₹800.00
- Author: Satish Arya
- Language: Hindi
- Pages: 946
- Edition: 2023
- Cover: Hard Cover
- ISBN: 9788171108800
- Weight: 1550 Gms.
Paatanjal Yogdarshan (Including Vyasbhashya & Bhojavritti)
The Ultimate Guide to Patanjali’s Yoga Sutras with Vyasbhashya & Bhojavritti
Are you seeking an in-depth understanding of Patanjali’s Yoga Sutras? Paatanjal Yogdarshan is an authoritative text that includes Vyasbhashya (commentary by Sage Vyasa) and Bhojavritti (explanation by King Bhoja), making it one of the most comprehensive resources on classical Yoga philosophy.
Why This Book is Essential for Yoga Enthusiasts & Scholars
✔ Authentic Sanskrit Commentary – A complete study of Patanjali’s Yoga Sutras with detailed explanations by ancient scholars.
✔ Deep Insights into Yoga Philosophy – Covers the eight limbs of Yoga (Ashtanga Yoga), mind control, and spiritual liberation.
✔ A Must-Read for Practitioners & Researchers – Essential for Yoga teachers, spiritual seekers, and those interested in Vedic wisdom.
✔ Comprehensive & Well-Structured – Explains how to achieve self-discipline, concentration, and enlightenment through Yogic principles.
✔ A Bridge Between Theory & Practice – Ideal for those who want to apply Patanjali’s wisdom in their daily lives.
Who Should Read This Book?
📖 Yoga practitioners & teachers
📖 Sanskrit & philosophy students
📖 Spiritual seekers & meditators
📖 Scholars of Indian philosophy & Vedic texts
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पातञ्जल योगदर्शन (व्यासभाष्य एवं भोजवृत्ति सहित)
पतंजलि योगसूत्रों का गहन अध्ययन – व्यासभाष्य एवं भोजवृत्ति सहित
क्या आप योग के गूढ़ रहस्यों को समझना चाहते हैं? पातञ्जल योगदर्शन ग्रंथ पतंजलि योगसूत्रों का प्रामाणिक संग्रह है, जिसमें व्यासभाष्य (महर्षि व्यास की टीका) और भोजवृत्ति (राजा भोज की व्याख्या) सम्मिलित हैं। यह ग्रंथ योग के सिद्धांतों को गहराई से समझने और उन्हें जीवन में अपनाने के लिए अत्यंत उपयोगी है।
यह पुस्तक क्यों पढ़नी चाहिए?
✔ प्रामाणिक संस्कृत व्याख्या – योगदर्शन पर महर्षि व्यास एवं राजा भोज की गूढ़ टीकाएं।
✔ योग साधना का सम्पूर्ण मार्गदर्शन – अष्टांग योग (यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि) का विस्तृत वर्णन।
✔ योग साधकों एवं शोधकर्ताओं के लिए अनिवार्य – योगाचार्यों, अध्यात्म साधकों और वेद-शास्त्र प्रेमियों के लिए अति उपयोगी।
✔ आध्यात्मिक उत्थान के लिए श्रेष्ठ ग्रंथ – आत्म-संयम, मनोनियंत्रण, ध्यान और मोक्ष प्राप्ति का मार्गदर्शन।
✔ सिद्धांत और अभ्यास का संगम – जो योग को सिर्फ ज्ञान के रूप में नहीं, बल्कि व्यावहारिक जीवन में अपनाना चाहते हैं, उनके लिए विशेष।
किनके लिए उपयुक्त है?
📖 योग साधक एवं शिक्षक
📖 संस्कृत एवं दर्शनशास्त्र के विद्यार्थी
📖 आध्यात्मिक एवं ध्यान करने वाले साधक
📖 भारतीय दर्शन एवं वेद-विज्ञान के शोधकर्ता
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योग के प्राचीन विज्ञान को समझें – आत्मशांति और मोक्ष के पथ पर अग्रसर हों! 🚩
वर्तमान संस्करण की भूमिका
योगदर्शन का यह विस्तृत भाष्य विद्वानों, अध्यात्मिक जगत के जनमानस, एवं योग के जिज्ञासुओं में हृदय में स्थान प्राप्त कर चुका है। न केवल योग के जिज्ञासुओं, वरन् योग के क्षेत्र में शोध करने वालों के लिए भी यह भाष्य महत्वपूर्ण है। योगदर्शन के अध्ययन एवं अध्यापन में संलग्न विद्वान् भी इस भाष्य को वरीयता देते हैं, और कई स्थलों पर योगदर्शन का शिक्षण इसी भाष्य के आधार पर ही किया जाता है।
योग को क्रियात्मक रुप से अपनाने वाले साधकों के लिए तो यह भाष्य एक अन्तरंग सहायक के रुप में है, जो साधक को योग के रहस्यों को समझने और आत्मसात् करने हेतु अतीव उपयोगी सिद्ध हुआ है। मेरे गुरुवर आचार्य अर्जुनदेव जी वर्णी, जिन्होंने इस भाष्य को आद्योपान्त देखा, ने समय समय पर इस भाष्य के संबंध में निम्न उद्गार प्रगट किये थे ।
- सभी दर्शनों पर इसी स्तर की व्याख्या होनी चाहिये।
- इस ग्रन्थ में योग से सम्बन्धित सभी आर्ष ग्रन्थों के प्रमाण दे दिये हैं- क्या ब्राह्मणग्रन्थ, क्या आरण्यक ग्रन्थ, क्या वेद, क्या उपनिषद, क्या ऋषि दयानन्द जी के ग्रन्थों के सन्दर्भ
- जिसने इस भाष्य को पढ लिया, उसने अनेकों ग्रन्थों का स्वाध्याय कर लिया।
- सभी गुरुकुलों में इसी भाष्य से योगदर्शन पढाया जाना चाहिये।
- जो इस भाष्य को नहीं पढेगा, वह अभागा होगा।
- आपने ऋषि की मान्यता को सर्वोपरि किया है।
पिछले पाँच संस्करण शीघ्रता पूर्वक समाप्त हो गए। पाठकों, योग जिज्ञासुओं और विद्वानों की लगातार मांग पर यह नया संस्करण प्रकाशित किया जा रहा है। कागज की कीमतों में अत्यधिक वृद्धि होने के कारण इसके मूल्य में कुछ वृद्धि करनी पड़ रही है, परन्तु फिर भी इसका मूल्य किसी अन्य इतने बड़े ग्रन्थ की अपेक्षा कम ही रखा गया है, ताकि यह अधिक से अधिक योग के जिज्ञासुओं तक पहुँच सके।
आशा करता हूँ कि विज्ञ पाठक इस ग्रन्थ के इस नवीन संस्करण का अधिक से अधिक लाभ उठाएंगे। अब अंगेजी भाषा-भाषी विद्वानों और वेद के जिज्ञासु पाठकों के लिए भी एक शुभ सूचना है- यजुर्वेद पर महर्षि दयानन्द सरस्वती के भाष्य का अंग्रेजी अनुवाद पूरा होकर प्रकाशित होने जा रहा है, जो विश्व जनमानस के लिए वेद के यथार्थ वैज्ञानिक स्वरूप और अर्थ को स्पष्ट करेगा, और अंग्रेजी भाषा जानने वाले वेदों के यथार्थ ज्ञान को प्राप्त करने में सहायक सिद्ध होगा।
सतीश आर्य
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