मन के मनके
Man Ke Manke

50.00

AUTHOR: Acharya Balkrishna (आचार्य बालकृष्ण)
SUBJECT: Man Ke Manke | मन के मनके
CATEGORY: Spiritual
LANGUAGE: Hindi
EDITION: 2016
PAGES: 100
PACKING: Paperback
WEIGHT: 170 g.

Description

अपनी बात

कुछ लिखा बालपन में, कुछ लिखा वैराग्य में, कुछ कराया परिस्थितियों ने, कुछ किया चाहत से, कुछ परिस्थितियाँ जगत् की, कुछ अवस्थाएं मन की और कुछ लिखा ज्ञान से। जो अच्छा है वह तो है शास्त्र का, गुरुजनों का, परमात्मा की कृपा का। शब्द कमजोर हो सकता है क्योंकि शिथिलता हमारी है, कमी रह गई होगी शिक्षा पाने में, पर कोई कसर बाकी न छोड़ी किसी ने इस छोटे से जीवन को शिक्षा देने में, जानता हूँ जो अल्पज्ञता है वह मेरी अपनी है।

परमात्मा से प्रकृति तक, व्यक्ति से समष्टि तक, जगत् से जंगल तक, जब-जब जो पाया, जो महसूस किया उसी को शब्दों में व्यक्त करने का ये छोटा सा प्रयास है। कहीं आपके काम आए, तो प्रयास सार्थक, अन्यथा आत्मतोष का आनन्द अपने और अपनों को अवश्य ही प्राप्त होगा क्योंकि शब्द अपने थे और संगृहीत कराने का आग्रह अपनों का था। अपनों की चाहत में बनाया इस ‘मन के मनके’ को अतः यह समर्पित करता हूँ उन्हीं को।

भवदीय,
आचार्य बालकृष्ण

 

शुभकामना

वेद एवं अधिकांश वैदिक संस्कृत साहित्य काव्यमय है। सम्पूर्ण सृष्टि को भगवान् का काव्य तथा परमेश्वर को कविर्मनीषी परिभूः स्वयंभूः (यजुर्वेद) वेदों में कवि कहा है। आयुर्वेद एवं ऋषियों की परम्परा के मूर्तरूप दिव्य ज्ञान, अखंड प्रचण्ड पुरुषार्थ या दिव्य कर्म ‘स्वेन क्रूरता संवदेत (ऋग्वेद)’ के उच्च आदर्श में जीने वाले आचार्यश्री में अतुल्य अप्रतिम सामर्थ्य है।

उस सामर्थ्य एवं दिव्य शिव संकल्प को आचार्य जी ने ‘मन के मनके’ में सहज काव्य के रूप में लिखा है। दो दशक से भी अधिक कालखंड के अनुभव व मन के भावों का इसमें अद्भुत व सुन्दर समावेश है। जीवन के विभिन्न पहलुओं को छूते हुए इन सहज स्फुटित कविताओं से सबको यथायोग्य प्रसन्नता व प्रेरणा आदि मिलेगी, ऐसा मुझे विश्वास है।

आचार्य जी के आयुर्वेद कौशल, प्रबन्धन, पुरुषार्थ एवं विशद कार्यों को मूर्त रूप देने के सामर्थ्य का तो अनुभव पहले से ही लाखों-करोड़ों लोगों को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से है ही। इस रचना के प्रकाशन से आचार्य जी के ज्ञानातिरेक व कर्मातिरेक के साथ-साथ भावातिरेक की भी एक सुखद अनुभूति होगी।

योगर्षि स्वामी रामदेव

Additional information
Weight170 g
Dimensions21.5 × 13.8 cm
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About Acharya Balkrishan
आचार्य बालकृष्ण का दिव्य साहित्य आधुनिक विज्ञान और आयुर्वेद का अद्भुत संगम आज के आधुनिक युग में जहाँ हम वापस अपनी जड़ों की ओर लौट रहे हैं, वहीं आयुर्वेद और योग के क्षेत्र में आचार्य बालकृष्ण जी का योगदान किसी मील के पत्थर से कम नहीं है। उनके द्वारा रचित पुस्तकें केवल कागज़ का संकलन नहीं, बल्कि वर्षों के गहन अनुसंधान (Research) और वैज्ञानिक प्रमाणों (Scientific Evidence) का निचोड़ हैं।

वैज्ञानिक अनुसंधान पर आधारित साहित्य

आचार्य श्री की लेखनी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उनकी प्रत्येक पुस्तक वैज्ञानिक प्रमाणों (Scientific Proofs) के साथ आती है। वे केवल प्राचीन ज्ञान को दोहराते नहीं हैं, बल्कि उसे आधुनिक प्रयोगशालाओं में परीक्षित कर, वैज्ञानिक तथ्यों के साथ पाठकों के सामने रखते हैं। यही कारण है कि उनकी पुस्तकें आज के शिक्षित और तार्किक समाज के बीच अत्यंत लोकप्रिय हैं।

योग और आयुर्वेद का खोजपूर्ण संकलन

आचार्य बालकृष्ण जी की पुस्तकें आयुर्वेद, जड़ी-बूटी और योग के रहस्यों को उजागर करती हैं। उनके साहित्य में निम्नलिखित बिंदु प्रमुखता से मिलते हैं:- अद्भुत और खोजपूर्ण सामग्री: उनकी पुस्तकें दुर्लभ जड़ी-बूटियों और उनके गुणों पर आधारित हैं, जो सदियों पुराने ज्ञान को सरल भाषा में उपलब्ध कराती हैं। प्रमाणिक उपचार: 'विश्व आयुर्वेद कोष' (World Herbal Encyclopedia) जैसे महान ग्रंथ इस बात का प्रमाण हैं कि उन्होंने आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान दी है। स्वस्थ जीवन का मार्ग: योग और प्राणायाम पर उनकी पुस्तकें केवल क्रियाएँ नहीं सिखातीं, बल्कि उनके शरीर पर होने वाले सूक्ष्म प्रभावों की वैज्ञानिक व्याख्या भी करती हैं।

स्वाध्याय: जीवन परिवर्तन की कुंजी

कहा जाता है कि अच्छी पुस्तकें हजारों मित्रों के बराबर होती हैं। आचार्य जी के साहित्य का स्वाध्याय (Self-study) करना हर उस व्यक्ति के लिए अनिवार्य है जो प्राकृतिक चिकित्सा और भारतीय संस्कृति में विश्वास रखता है।"आचार्य बालकृष्ण जी का साहित्य पढ़ने का अर्थ है—अपने शरीर, मन और स्वास्थ्य को गहराई से समझना।" यदि आप अपने जीवन में पूर्ण स्वास्थ्य और वैचारिक स्पष्टता चाहते हैं, तो आचार्य बालकृष्ण जी की पुस्तकों को अपने पुस्तकालय का हिस्सा अवश्य बनाएँ। उनकी पुस्तकें न केवल ज्ञान का भंडार हैं, बल्कि एक स्वस्थ राष्ट्र के निर्माण का आधार भी हैं।
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