क्या खोया क्या पाया ?
Kya Khoya Kya Paya ?

120.00

AUTHOR:Rajendra ‘Jigyasu’ (राजेंद्र ‘जिज्ञासु’)
SUBJECT:क्या खोया क्या पाया ? | Kya Khoya Kya Paya ?
CATEGORY:History
LANGUAGE:Hindi
EDITION:2020
PAGES:216
BINDING:Paper Back
WEIGHT:200 GM
Book Details:
  • Author: Rajendra 'Jigyasu'
  • Language: Hindi
Description

क्या खोया क्या पाया ?
इस ग्रन्थ को क्यों पढ़ें ?

१. प्रेरक प्रसंग पढ़ सुनकर संसार में असंख्य लोगों के जीवन बदल गये। विश्व इतिहास तथा विश्व साहित्य इसका साक्षी है। इस ग्रन्थ को क्यों पढ़ें ? इस प्रश्न का सबसे बड़ा कारण यही है। जीवन-निर्माण के प्रत्येक चाहवान तक ऐसा श्रेष्ठ साहित्य पहुँचाने को अपने जीवन का मिशन बनाकर यह लेखक गत साठ वर्षों से ऐसे साहित्य को निरन्तर उपलब्ध करवा रहा है।

२. इस ग्रन्थ की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें देश तथा समाज के प्रत्येक वर्ग के व्यक्तियों के जीवन के प्रेरक प्रसंग मिलेंगे। नेताओं के, बलिदानियों के, गुणियों के, ज्ञानियों के, सुधारकों के, किसानों के, श्रमिकों के, शिक्षित-अशिक्षित नागरिकों, कुमारों के, उच्च पदों पर आसीन पुरुषों के- यहाँ तक कि आप पिछड़े से पिछड़े सेवक (चपरासी) तक के श्रेष्ठाचरण के प्रेरक प्रसंग इस ग्रन्थ में पाकर – पढ़कर झूम उठेंगे।

३. इस ग्रन्थ में युग की धारा को नया मोड़ देने वाली विभूतियों के इतिहास प्रसिद्ध प्रेरक प्रसंग पढ़ेंगे तो पिंजरे में बन्दी बनाकर रखे गये एक युवा क्रान्तिवीर पं० नरेन्द्र के पिंजरे के समीप आकर मीठी नींद सोये हुये विद्रोही नरेन्द्र के पाँव को सिंह द्वारा चाटने का प्रसंग पढ़कर कौन सहृदय व्यक्ति रोमांचित नहीं होगा ?

४. कभी स्वामी श्रद्धानन्द जी महाराज, स्वामी स्वतन्त्रानन्द जी तथा पं० विष्णुदत्त जी वकील इस विधा पर लिखने के आचार्य माने जाते थे। इस पुस्तक के लेखक ने उनसे प्राप्त इस देन को विकसित करके किस शिखर तक पहुँचाया है ? इसका निर्णय आपका हृदय क्या देता ? यह आप बतावें ।

4. इस पुस्तक में देश तथा आर्यसमाज के इतिहास की कई लुप्त गुप्त कड़ियों पर प्रकाश डालकर इतिहास शास्त्र को लेखक ने मालामाल कर दिया है यथा डा० सत्यपाल तथा उनके पिता पिंजरों में बन्द एक ही जेल में दूर-दूर रखे गये। ऐसी क्रूरता ! महाशय कृष्ण के परिवार के सब पुरुष सदस्य स्वराज्य संग्राम में जेल में रहे। लाला लाजपतराय को मित्रों ने माण्डले में एक पत्र तक न लिखा।

६. आर्यसमाज के दिलजले विद्वानों को हाथों व पैरों में बेड़ियाँ तक डाली गईं।

७. इस पुस्तक में देश के प्रत्येक भाग के प्रेरक प्रसंग मिलेंगे। केवल पंजाब हरियाणा के नहीं। तीन वर्ष के एक आर्य शिशु का कर्नाटक में बलिदान हुआ।

८. स्वराज्य संग्राम में एक आर्य संन्यासी को गुफा में रखा गया जिसमें खिड़की तक नहीं थी। क्यो? उसने हरियाणा के सैनिकों को देशहित में विद्रोह की घुट्टी पिलाई थी। ऐसा इतिहास हर कोई इस रोचक शैली में नहीं दे सकता।

९. इस देश में एक ‘राष्ट्रपति’ कारागार में जन्मा। क्या आपने सुना ? पढ़िये इसमें ।

१०. जो देश के लिये जीवित जलाये गये उनकी चर्चा भी इसी में मिलेगी।

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