वेदों को जानें Know the Vedas
₹300.00
- Author: Dr. Vivek Arya
- Language: Hindi
- Publication: Bharatiya Hindu Shuddhi Sabha
- Pages: 353
- Edition: 2023
- Cover: Paperback
- Weight: 410 Gms.
भूमिका
किसी आठवीं कक्षा के विद्यार्थी से वेद और आर्यों के विषय में सामान्य से प्रश्न पूछें, वह उत्तर देगा – आर्य लोग बाहर से आये थे, वेद गड़रियों के गीत हैं, वैदिक काल में यज्ञों में पशु बलि का विधान था, आर्य लोग सोमरस का नशा करते थे, वेदों में यम-यमी के रूप में भाई-बहन का अश्लील संवाद है। नारी और शूद्र को वेद पढ़ने, सुनने का कोई अधिकार नहीं है।
वेदों के विषय में 99 प्रतिशत जन सामान्य की यही मान्यता है। वेदों के सत्य सन्देश से लगभग सम्पूर्ण मानव जाति अनभिज्ञ है। इस शोचनीय अवस्था के दो प्रमुख कारण हैं। प्रथम तो वेदों के सत्य ज्ञान से जनमानस को शिक्षित करने का कोई भी विकल्प पाठ्यक्रम के माध्यम से उपलब्ध नहीं है, दूसरा वेदों के विषय में भ्रांतियों का अधिकाधिक प्रचार-प्रसार हो रहा है।
इसे हम मनुष्य जाति के साथ अन्याय ही कहेंगे कि आज के युग में जब विज्ञान इतनी प्रगति कर चुका है, जब टेलीविजन, इंटरनेट आदि के सशक्त माध्यम उपलब्ध हैं, उस पर भी वेदों को जनमानस तक पहुँचाने का कोई सार्थक एवं दूरगामी प्रयास प्रभावशाली स्तर पर हमें देखने को नहीं मिल रहा है। वेदों के प्रति अश्रद्धा एवं अविश्वास के चलते न जाने कितने हिन्दू हर वर्ष नास्तिक और विधर्मी बनकर अपना जीवन सार्थक बनाने के स्थान पर व्यर्थ कर देते हैं।
वे स्वयं भी अंधकारमय जीवन जीते हैं अन्यों को भी भ्रमित कर उनका जीवन भी नष्ट कर देते हैं। इस पुस्तक को लिखने का मूल उद्देश्य वेदों के विषय में निरंतर फैल रही इन्हीं भ्रांतियों का निवारण कर सत्य का प्रचार करना है, जिससे मानव जाति के मन में वेदों के प्रति न केवल श्रद्धा की वृद्धि हो अपितु वेदों के महान् सन्देश का पालन कर सभी जीवन में उन्नति कर मोक्ष पथ के गामी बने।
दिसम्बर 2015 में ‘वेदों को जानें’ के नाम से एक लघु पुस्तक का मैंने लेखन किया था। इस पुस्तक को अत्यंत प्रसिद्धि मिली और मुझे अनेक स्वध्यायशील युवाओं से धन्यवाद रूपी सन्देश मिले। 2020 के विश्व पुस्तक मेले में आर्यसमाज के स्टाल पर मुझे दो युवा मुस्लिम भाई-बहन मिले जो स्वर्गीय पद्मश्री मौलाना वहीउद्दीन जी के परिवार से थे। आपने वैदिक ग्रंथों में रुचि दिखाई और चारों वेदों के दर्शन दिल्ली आर्य प्रतिनिधि सभा द्वारा प्रायोजित आर्यसमाज के स्टाल में किये।
आपने मुझे कहा कि अगर कोई युवा वेदों के विषय में आरम्भिक जानकारी लेना चाहता हो तो उसके लिए कोई शोध पूर्ण शैली में लिखी गई पुस्तक अत्यंत उपयोगी रहेगी। मुझे उन्होंने बृहद् स्वरूप से ग्रन्थ लिखने की प्रेरणा दी। 2020 के लॉक डाउन में मुझे समय मिला तो मैंने इसका लेखन किया। अब इसका प्रकाशन हो रहा है। इस पुस्तक को शोध शैली की वैज्ञानिक रीति से मैंने लिखा है। जिससे पुस्तक की प्रमाणिकता बनी रहे।
इस पुस्तक में मैंने स्वामी दयानंद एवं उनकी वेदार्थ शैली का अनुसरण करने वाले अनेक विद्वानों के पुरुषार्थ रूपी साहित्य को सरल, पुस्तक रूप में संग्रहीत करने का प्रयास मात्र किया है। सत्य सनातन वेदों के सन्देश को एक पुस्तक में संकलित करना असंभव है क्योंकि जैसे ईश्वर अनंत हैं, ऐसे ही ईश्श्वर का ज्ञान भी अनंत है। अभी भी इस पुस्तक में परिवर्धन एवं संशोधन की अपार संभावनाएं हैं।
विद्वानों के आशीर्वाद एवं ईश्वर की अनुकम्पा से यह कार्य संपन्न हुआ है। इस पुस्तक के लेखन में मेरा सहयोग मेरे श्री सहदेव शास्त्री, श्री संजय कुमार, श्री प्रियांशु सेठ, श्री कार्तिक अय्यर, श्री सुभाष दुआ ने दिया है। मैं उनका अत्यंत आभारी हूँ। मैं आशा करता हूँ कि भविष्य में भी साहित्य के माध्यम से वैदिक धर्म की सेवा करता रहूं।
डॉ० विवेक आर्य
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