कर्म एवं कर्मफल मीमांसा
Karma Evam Karmaphal Mimansa

795.00

Book Details:
  • Author: Satish Arya
  • Language: Hindi
  • Pages: 552
  • Edition: 2023
  • Cover: Hard Cover
  • ISBN: 9788192110400
  • Weight: 740 Gms.
Description

प्राक्कथन

मानव जीवन का सबसे जटिल तथा उलझनपूर्ण विषय है-कर्म तथा उन कर्मों से मिलने वाला फल। महर्षि व्यास ने भी कहा है ‘कर्मगतिश्चित्रा दुर्विज्ञाना चेति।’ (योग० २.१३ पर भाष्य) अर्थात् कर्म गति विचित्र तथा कठिनता से जानी जाती है। आज के वर्त्तमान काल में जब आर्य मान्यताओं का अधिक ह्रास हो चुका है तथा बेदादि सत्यशास्त्रों के पठन-पाठन की परम्परा ही नहीं रही, तो इस जटिल विषय पर अनेक मतमतान्तरों द्वारा, जनमानस को भ्रमित करने हेतु, अपने-अपने मनभावन सिद्धान्त अरोपित किए गए हैं। इस प्रकार इस जटिल विषय की जटिलता को और बढ़ा दिया है।

इस विषय पर आज मानव जगत में जितना भ्रम तथा मतभेद है उतना महाभारत काल में पूर्व नहीं रहा था। आज का मानव अपने कर्मों को तथा इस जीवन में मिलने वाले सभी मुख-दुःखों को पूर्व निश्चित मानता हैः तथा यह मान्यता भी प्रचलित है कि जो कुछ भी हो रहा है या आगे होगा या पूर्व में हो चुका है वह सब ईश्वर की इच्छा से है। ईश्वर की इच्छा के विना पत्ता भी नहीं हिल सकता।

इस सब को नियतिवाद के सिद्धान्न के नाम से माना जाता हैं। वर्तमान काल में विभिन्न मतों एवै सम्प्रदायों के तथाकथित स्वयंभू धर्माचायों द्वारा प्रचलित विभिन्न मान्यताओं का मार यही है कि सभी कुछ ईश्वर की इच्छा में ही हो रहा है। इसी नियतिवाद ने मानव को इतना निष्क्रिय कर दिया है कि या तो पुरुषार्थ होता ही नहीं और अगर होता भी है तो विपरीत दिशा में।

इन विपरीत मान्यताओं के कारण ही मानय, कम तथा कर्मफल के मूल सिद्धान्नों को समझ नहीं पाता जिसके कारण वह अपने जीवन के लिए क्या मही है? और क्या गलत है? इसका निर्णय नहीं ले पाता।

मानवयोनि कर्मयोनि है और अगर हम कर्म तथा कर्मफल की मीमांसा को ही यथार्थ रूप में समझ नहीं पायेंगे तो मानव जीवन व्यर्थ ही चला जाएगा। मानव जीवन में जीब का परम लक्ष्य तो मात्र एक ही है, और वह ई-परमपिता परमात्मा का साक्षात्कार कर मोक्षानन्द प्राप्त करना। और इसके लिए कर्म तथा कर्मफल को मीमांसा को समझना परम अनिवार्य है, ताकि हम अपने जीवन में मन्य को अपना कर. अमात्य का त्याग कर सके तथा अपने जीवन के परम लक्ष्य के मार्ग पर अग्रसर हो सके[/vc_column_text][/vc_column][/vc_row]

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