जाति भेद का अभिशाप
Jaati Bhed Ka Abhishap

30.00

AUTHOR: Pt. Kshitish Vedalankar (क्षितीश वेदालंकार)
SUBJECT: Jaati Bhed Ka Abhishap | जाति भेद का अभिशाप
CATEGORY: History
LANGUAGE: Hindi
EDITION: 2026
ISBN: 9789334319965
PAGES: 31
BINDING: Paperback
WEIGHT: 45 g.
Description

दो शब्द

जाति भेद भारतीय समाज का अभिशाप है। भारतीय समाज के विशाल संगठन को यह रोग घुन की भाँति खा रहा है। भारतीय समाज की आधार भित्ति वर्णव्यवस्था के पुनरुत्थान के मार्ग में यह सब से बड़ी बाधा है और भारतीय आदर्शों के बीच में चन्द्रमा के कलंक के समान है।

भारतवर्षीय आर्य कुमार परिषद् ने अपने जीवन में इस कुप्रथा के विरुद्ध प्रबल आन्दोलन किये हैं और यह उसके कार्यक्रम का एक अंग रहा है। सन् १९४८ ई० में शिकोहाबाद में होनेवाले सम्मेलन के अध्यक्ष पद से भाषण करते हुए उत्तरप्रदेशीय सरकार के सभा सचिव श्री चौ० चरण सिंह जी ने परिषद् से केवल इसी एक कार्यक्रम को अपनाने का अनुरोध किया था।

हर्ष की बात है कि परिषद् काफी प्रयत्नों के पश्चात इस दिशा में एक पग उठा सकी है। प्रस्तुत पुस्तक इसका प्रमाण है। पुस्तक के लेखक महोदय विद्वान् तथा अनुभवी पत्रकार होने के अतिरिक्त समाजशास्त्र विषय में गहरी दिलचस्पी रखते हैं। अतः पुस्तक अपने विषय का प्रतिपादन करने में सफल हुई है, इस में कोई सन्देह नहीं है।

पुस्तक का प्रचार और सफलता अब आर्य कुमार सभाओं पर निर्भर है। उनका कर्तव्य है कि अधिक-से-अधिक संख्या में पुस्तक को जनता तक पहुँचावें और परिषद् को शीघ्र ही द्वितीय संस्करण प्रकाशित करने का अवसर प्रदान करें।

भवदीय
ईश्वर दयालु आर्य?
कार्यकर्त्ता प्रधान
भारतवर्षीय आर्य कुमार परिषद्

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