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चाणक्य-सूत्र Chankya Sutra
₹90.00
- By :Acharya Balkrishan
- Subject :Chankya Sutra
- Edition :2016
- ISBN# :9789385721083
- Pages :143
- Binding :PAPERBACK
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आचार्य चाणक्य भारतीय इतिहास की अनुपम विभूति थे l ईसा पूर्व चौथी शताब्दी में यूनान के राजा सिकंदर ने तथा उसके सेनापति सेल्यूकस ने कुछ देशविद्रोहियों की सहायता से भारतवर्ष पर आक्रमण किया था l तब तक्षशिला विश्वविद्यालय में दण्डनीति (राजनीति) के महान आचार्य चाणक्य ने अपने शिष्य चन्द्रगुप्त के नेतत्व में सैन्यशक्ति संगठित कर विदेशी आक्रान्ताओं को बुरी तरह परास्त किया था l भविष्य में कोई विदेशी आक्रांता भारत की और आंख उठाकर न देख सकें, इसीलिए क्रान्तदर्शी आचार्य ने भारतवर्ष के वर्ष सभी गणराज्यों को चन्द्रगुप्त के नेतृत्व में संगठित कर इस देश को अखण्ड एवं शक्तिसंपन्न भारत राष्ट्र का रूप दिया था l
हिमालय से समुद्र पर्यन्त भारत एक चक्रवर्ती साम्राज्य का क्षेत्र हैं, इस प्राचीन अवधारणा को गणराज्यों के काल में भी चाणक्य ने प्रतिष्ठापित किया और इस दिशा में विशेष सफलता प्राप्त की l उन्होंने सम्राट चन्द्रगुप्त के रूप में देश को एक आदर्श शासक दिया और कौटिल्य अर्थशास्त्र के रूप में युगानुरूप आदर्श शासन व्यवस्था भी दी l
विदेशी आक्रान्ताओं द्वारा भारत को पददलित कर देने पर संस्कृति और साहित्य पर बड़ा आघात हुआ था l ऐसे उथल-पुथल के समय में कौटिल्य का अर्थशास्त्र भी लुप्तप्राय (गुमनाम-सा) हो गया था l सन् १९०५ ई . में तज्मोर (तमिलनाडु) के एक अज्ञातनामा ब्राह्मण ने कौटिल्य अर्थशास्त्र की एक हस्तलिखित तालपत्रीय प्रतिलिपि मैसुर के राजकीय प्राच्य ग्रंथालय को भेंट में दी l ग्रंथालय के तत्कालीन अध्यक्ष श्री शामशास्त्री ने उसका सुक्ष्म अवलोकन किया और यथासम्भव शोधन कर १९०९ ई. में प्रथम बार प्रकाशन किया l इस ग्रन्थ में वर्णित आर्थिक, सामाजिक, राजनितिक, प्राशासनिक एवं न्यायव्यवस्था सम्बन्धी विचार में भारत के साथ-साथ विकसित माने जाने वाली राष्ट्रों में हलचल मचा दी, क्योंकि इन तथ्यों से अभी तक लोग अनभिज्ञ थे l जर्मनी, अमेरिका, इंग्लैंड, पूर्व सोवियत संघ आदि राष्ट्रों में इस ग्रन्थ का मंथन कर इसके प्रत्येक पक्ष पर अनेक विवेचनात्मक ग्रन्थ लिखे हैं l फ्लीट, जौली आदि विद्वानों ने इसे अत्यंत महत्त्वपूर्व बताया और इसकी महती उपादेयता पर प्रकाश डाला l
| Weight | 160 g |
|---|---|
| Dimensions | 20.2 × 13 cm |
| Author | Acharya Balkrishan |
वैज्ञानिक अनुसंधान पर आधारित साहित्य
आचार्य श्री की लेखनी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उनकी प्रत्येक पुस्तक वैज्ञानिक प्रमाणों (Scientific Proofs) के साथ आती है। वे केवल प्राचीन ज्ञान को दोहराते नहीं हैं, बल्कि उसे आधुनिक प्रयोगशालाओं में परीक्षित कर, वैज्ञानिक तथ्यों के साथ पाठकों के सामने रखते हैं। यही कारण है कि उनकी पुस्तकें आज के शिक्षित और तार्किक समाज के बीच अत्यंत लोकप्रिय हैं।योग और आयुर्वेद का खोजपूर्ण संकलन
आचार्य बालकृष्ण जी की पुस्तकें आयुर्वेद, जड़ी-बूटी और योग के रहस्यों को उजागर करती हैं। उनके साहित्य में निम्नलिखित बिंदु प्रमुखता से मिलते हैं:- अद्भुत और खोजपूर्ण सामग्री: उनकी पुस्तकें दुर्लभ जड़ी-बूटियों और उनके गुणों पर आधारित हैं, जो सदियों पुराने ज्ञान को सरल भाषा में उपलब्ध कराती हैं। प्रमाणिक उपचार: 'विश्व आयुर्वेद कोष' (World Herbal Encyclopedia) जैसे महान ग्रंथ इस बात का प्रमाण हैं कि उन्होंने आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान दी है। स्वस्थ जीवन का मार्ग: योग और प्राणायाम पर उनकी पुस्तकें केवल क्रियाएँ नहीं सिखातीं, बल्कि उनके शरीर पर होने वाले सूक्ष्म प्रभावों की वैज्ञानिक व्याख्या भी करती हैं।स्वाध्याय: जीवन परिवर्तन की कुंजी
कहा जाता है कि अच्छी पुस्तकें हजारों मित्रों के बराबर होती हैं। आचार्य जी के साहित्य का स्वाध्याय (Self-study) करना हर उस व्यक्ति के लिए अनिवार्य है जो प्राकृतिक चिकित्सा और भारतीय संस्कृति में विश्वास रखता है।"आचार्य बालकृष्ण जी का साहित्य पढ़ने का अर्थ है—अपने शरीर, मन और स्वास्थ्य को गहराई से समझना।" यदि आप अपने जीवन में पूर्ण स्वास्थ्य और वैचारिक स्पष्टता चाहते हैं, तो आचार्य बालकृष्ण जी की पुस्तकों को अपने पुस्तकालय का हिस्सा अवश्य बनाएँ। उनकी पुस्तकें न केवल ज्ञान का भंडार हैं, बल्कि एक स्वस्थ राष्ट्र के निर्माण का आधार भी हैं।

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