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इस देश में बसे समाज की संस्कृति और आचार संहिता गंगा की पावन धारा की भाँति अनन्तकाल से चली आ रही है । फिर भी यह अपने स्रोत के समीप ही पवित्र है , स्वच्छ है , मधुर है और रोग – नाशक है । हुगली की धारा भी है तो गंगा ही की धारा , परन्तु इसमें बहुत कुछ मल – मूत्र , कीचड़ और कचरा मिल गया है । इस कारण यदि इस धारा से लाभ उठाना है तो इसका पान गंगोत्री में जाकर ही करना होगा । भारत अति उन्नत देश था और यहाँ के रहने वालों की आचार संहिता अति श्रेष्ठ थी । फिर भी यह देश और इसमें रहने वाली जाति एक सहस्र वर्ष से मध्य एशिया की बर्बर जातियों के पाँवों की ठोकरें खा रही है ।

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