धर्म बलिदानियों को जानें
Dharm Balidaaniyon ko janen

80.00

Book Details:
  • Author: Dr. Vivek Arya
  • Language: Hindi
  • Publication: Bharatiya Hindu Shuddhi Sabha
  • Pages: 105
  • Edition: 2026
  • Cover: Paperback
  • ISBN: 9789334131550
  • Weight: 135 Gms.
Description

भारत देश का इतिहास धर्म बलिदानियों का इतिहास है। यहाँ की मिट्टी में अनेकों ऐसे रणबांकुरों ने जन्म लिया जिनके महान् बलिदान से सदियों के पश्चात् भी प्रेरणा मिलती हैं। खेद है कि स्वतंत्र भारत में इतिहास पुस्तकों में ऐसे महान् बलिदानों को यथोचित स्थान नहीं मिला। यह एक षड्यंत्र के अंतर्गत किया गया। पाठयक्रम जाने वाली इतिहास पुस्तकों में विदेशी आक्रमणकारियों के जितने की घटनाओं को बढ़ा-चढ़ा कर लिखा गया। जबकि हमारे रणबांकुरों के शौर्य गाथा को सर्वथा भुला दिया गया। यह इतिहास के नाम पर बौद्धिक आतंकवाद है।

अंग्रेजी बहुत चालाक कौम है। अपनी विजय को दृढ़ बनाये रखने के लिए यह षड्यंत्र रचा था। स्वतंत्र भारत के स्वघोषित इतिहासकार अपनी तुच्छ स्वार्थों के लिए आज तक इसे प्रोत्साहित कर रहे हैं। हमारे महान् इतिहास, हमारी संस्कृति, हमारी परम्परा को अगर भारतवासी जान गए, तो उनके मन से पराजय बोध सदा के लिए लुप्त हो जायेगा। संसार की श्रेष्ठ जाति होने का बोध हो जायेगा। इस पुस्तक के माध्यम से हमारे धर्म बलिदानियों के महान् योगदान की पुनः स्मृत किया गया हैं। इसे पढ़कर हमारी युवा पीढ़ी प्रेरणा लें। यही ईश्वर से प्रार्थना है।

गत 1200 वर्षों में एक के पश्चात् एक आक्रमणकारी देश पर हमला करने आये। हमारे महान् पूर्वजों ने उनका प्रतिकार किया उन्हें लौटने को विवश कर दिया। अनेक आक्रमणकारी काल का ग्रास बने। मुगलों को कभी हमने चैन से बैठने नहीं दिया। दक्षिण में मराठा, पंजाब में सिख, असम में अहोम, नारनौल में सतनामी, आगरा में जाट, बुंदेलखंड में छत्रसाल, राजस्थान में राठोड़ बहादुरों ने मुगलिया सल्तनत की ईंट से ईंट बजा दी। यह धर्म रक्षा के लिए दिए गए महान् बलिदान थे। जो विस्मृत हो गए। इस पुस्तक में ऐसे बलिदानों को संगृहीत करने का प्रयास किया गया है।

इस पुस्तक के लेखन और संपादन में श्री विजय कुमार सिंघल, श्री संजय कुमार, श्री प्रियांशु सेठ का सहयोग मिला। हम आप सभी के आभारी हैं। पुस्तक के प्रकाशन में श्री सुभाष दुआ, महामंत्री भारतीय हिन्दू शुद्धि सभा का आशीर्वाद सदैव की भांति मिला।

डॉ० विवेक आर्य

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