ब्रह्मविद्यासर्वस्वम् (3 खंड) | Brahmavidyasarvasvam (3 Volumes)
₹2,500.00
- Author: Sudhanshu Chaturvedi
- Language: Hindi, Sanskrit-Hindi
- Pages: 1626
- Edition: 2026
- Cover: Hard Cover
- ISBN: 9788171108183, 9788171108190, 9788171108206
- Weight: 2420
उपनिषदें जिस ब्रह्मविद्या या आत्मविद्या का प्रतिपादन करती हैं, वह अत्यन्त पावन एवं महनीय है, ऐसा विश्वास भारत में यत्र-तत्र-सर्वत्र है, सार्वजनीन भी है। वेद के सागर का मन्थन करके निकाला गया ज्ञानामृत है ब्रह्मविद्या। भारत के मन में बारम्बार उभरनेवाली ओज की स्मृति है ब्रह्मविद्या। जब शंकराचार्य ने वेद को क्षीरसागर कहा, तब रामानुजाचार्य ने उपनिषदों को क्षीरसागर बना दिया। अद्वैतवादी तथा द्वैतवादी ही नहीं, समूचे चिन्तनों के पथिक ब्रह्मविद्या के पीयूष को प्राप्त करने के अभिलाषी थे।
पुरातन काल में विभिन्न पन्थानुयायी एक स्वर में उपनिषदों का आदर किया करते थे, अधुनातन युग में भी कोई अन्तर नहीं आया है। विवेकानन्द, रवीन्द्रनाथ टैगोर, अरविन्द घोष, महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, एस. राधाकृष्णन् आदि भारत के आधुनिक शब्द के विभिन्न स्वरवाले सभी महानुभाव उपनिषद् के समक्ष नतमस्तक खड़े रहते हैं। इसीलिए ब्रह्मविद्यासर्वस्वम् के प्रथम खण्ड में सर्वश्रेष्ठ ग्यारह उपनिषदों को संग्रहीत किया गया है।
ये हैं- ईशावास्योपनिषद्, केनोपनिषद्, कठोपनिषद्, प्रश्नोपनिषद्, मुण्डकोपनिषद्, माण्डूक्योपनिषद् (गौडपादकारिका सहित), तैत्तिरीयोपनिषद्, ऐतरोपनिषद्, श्वेताश्वतरोपनिषद्, छान्दोग्योपनिषद्, तथा बृहदारण्यकोपनिषद् । इनको संस्कृत के मूल श्लोक तथा हिन्दी अनुवाद के साथ प्रस्तुत किया गया है। अन्त में इनकी श्लोकानुक्रमणिका भी दी गई है। द्वितीय खण्ड में सर्वसम्मत प्रेरणाप्रद श्रीमद्भगवद्गीता, अष्टावक्रगीता, अवधूतगीता, रामगीता, जीवन्मुक्तगीता, मूल श्लोक तथा हिन्दी अनुवाद के साथ प्रस्तुत किए गए हैं। इस खण्ड के अन्त में जगद्गुरु शंकराचार्य विरचित सुप्रसिद्ध विवेकचूड़ामणि को भी मूलश्लोक और हिन्दी अनुवाद के साथ समाहित किया गया है।
ब्रह्मविद्यासर्वस्वम् के तृतीय खण्ड में अद्वैत के प्रतिष्ठापक परमाचार्य शंकर के सर्ववेदान्तसिद्धान्तसारसंग्रह, उनके शिष्योत्तम विद्यारण्यस्वामी विरचित पञ्चदशी का हिन्दी अनुवाद मूलश्लोक के साथ, ब्रह्मविद्या का मूलभूत अलौकिक सन्देश तथा महर्षि वसिष्ठ विरचित योगवासिष्ठ के समस्त प्रकरणों का सार दिया गया है। इस प्रकार ब्रह्मविद्यासर्वस्वम् एक अद्भुत प्रेरणाप्रद ग्रन्थ बन गया है। विश्वास है कि यह ग्रन्थ अद्वैतवेदान्त के विद्वानों, अध्यापक, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों तथा सामान्य जागरूक जनता के लिए उपयोगी एवं संग्रहणीय ग्रन्थ सिद्ध होगा।
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