भारत के आदर्श व्यक्तितव
Bharat Ke Adarsh Vyaktitwa

50.00

AUTHOR: Acharya Balkrishna (आचार्य बालकृष्ण)
SUBJECT: Bharat Ke Adarsh Vyaktitwa | भारत के आदर्श व्यक्तितव
CATEGORY: Motivational Stories
LANGUAGE: Hindi
EDITION: 2017
PAGES: 116
PACKING: Paperback
WEIGHT: 120 g.

Description

भूमिका

अपने युग में विराट् आन्दोलन की धाराओं को अपने अन्दर आत्मसात् कर हमारे ऋषि-मुनियों, शहीदों समाज सुधारकों व युगप्रवर्तकों ने आत्मकल्याण के साथ राष्ट्रहित को सर्वोपरि मान कर राष्ट्र के उत्थान में नई चेतना व जागृति के लिए अपने आप को आहुत किया। इसीलिए वे किसी एक के न बनकर सार्वदेशिक, सार्वकालिक हो गए। उनके उपदेश व उनके जीवन की प्रासांगिकता आज पहले से भी ज्यादा बढ़ गई है। आज़ादी का गीत गा कर प्राणोत्सर्ग करने वाले वीर, स्वतंत्रता प्रेमियों ने अपने नाम और यश के लिए काम नहीं किया। अगणित अनाम शहीद हैं। उनके प्रति नमित होना हमारा कर्त्तव्य है।

इन शहीदों के गीत पवन गाता है, सूर्य की प्रभाती रश्मियाँ उनका वंदन करती हैं। देश के विभिन्न हिस्सों में शहीदों की स्मृति में स्थापित कीर्ति स्तम्भ तथा मूर्तियों पर शुभ्र चांदनी अपनी निरभ्र और शीतल छाया से उनका यशोगान करती हैं। देश भक्ति से ओत-प्रोत भावी संततियां उनका निरंतर स्मरण करेंगी। मातृभूमि और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए प्रेरणा शक्ति और संकल्प भाव ग्रहण करेंगी। इतना सब होने के बाद भी हमने उन वीरों, संतों व शहीदों की शहादत को भुला दिया है। आज़ादी के छः दशक बाद भी आज भारत की सारी व्यवस्थाएं वही चल रही हैं जो अंग्रेजों ने चलाई थी।

भारत की शिक्षा व्यवस्था, न्याय व्यवस्था, प्रशासन व्यवस्था, कृषि व्यवस्था एवं चिकित्सा व्यवस्था आदि-आदि सभी अंग्रेजों के जमाने वाली ही हैं। कैसा हमारे देश का दुर्भाग्य है, लाखों क्रान्तिवीर शहीदों ने जिन अंग्रेजी व्यवस्थाओं के खिलाफ संघर्ष करते हुए अपने प्राणों का बलिदान कर दिया, वही व्यवस्थाएँ भारत में आज भी बनी हुई हैं। हम शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि तभी अर्पित कर सकते हैं, जब उनका अधूरा छूटा हुआ काम पूरा करें।

प्रस्तुत पुस्तक इसी प्रयास का एक हिस्सा है। भारत के अमर शहीदों एवं क्रान्तिकारियों के जीवन चरित्रों को इसी संकल्प के साथ प्रस्तुत किया जा रहा है। श्रद्धेय स्वामी रामदेव जी महाराज ने भारत स्वाभिमान ट्रस्ट की स्थापना कर 100 प्रतिशत् योगमय भारत का निर्माण कर स्वस्थ, समृद्ध, संस्कारवान् भारत बनाने का अभियान शुरू किया है। इसी से आयेगी देश में नई आज़ादी व नई व्यवस्था और भारत बनेगा महान् और राष्ट्र की सबसे बड़ी समस्या भ्रष्टाचार का होगा समाधान।

श्रद्धेय स्वामी जी महाराज के संकल्पों से संकल्पित होकर पतंजलि योगपीठ ने ‘हमारे आदर्श व्यक्तित्व’ के रूप में ऐतिहासिक प्रेरणाप्रद व्यक्तित्व व जीवन चरित्रों को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया है। स्वदेशी व राष्ट्र के प्रति जिनकी पीड़ा सर्वविदित ऐसे श्री राजीव भाई जी का एवं डॉ० राजेन्द्र विद्यालंकार जी का प्रस्तुत पुस्तक के शीघ्र प्रकाशन में महत्वपूर्ण सहयोग रहा है, उनके इस पुण्य प्रयास के लिए कोटिशः आशीर्वाद।

सम्पादन में सर्वविद सहयोग बहन सुमन जी का रहा, उनको हमारी ढेर सारी शुभकामनाएं एवं आशीर्वाद। टंकण कार्य को शीघ्र पूर्ण कर मुद्रित करने के लिए भाई ऋषिदेव व इन्द्रजीत शर्मा को बहुत आशीर्वाद। पुस्तक प्रकाशन में प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से जिनका भी सहयोग प्राप्त हुआ उन सभी का आभार व धन्यवाद ।

ह पुस्तक अपने उद्देश्य में पूर्ण हो जिससे लोगों के जीवन में नया उत्साह भरे व नई प्रेरणा प्राप्त हो। अन्त में इस संकल्प के साथ-

जो प्राप्त वीरगति करते हैं, उन वीरों को मत भूल सखे ! जो भारत-गौरव हेतु मरे, उनको श्रद्धा से नमन करो। पद-चिह्न जो छोड़ गये उन्हीं पद-चिह्नों का अनुसरण करो। जो मनुज शहीद हुए, उनके आदर्शों का नित वरण करो ॥

 आचार्य बालकृष्ण

Additional information
Weight120 g
Dimensions21 × 13.2 cm
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Bharat Ke Adarsh Vyaktitwa”

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About Acharya Balkrishan
आचार्य बालकृष्ण का दिव्य साहित्य आधुनिक विज्ञान और आयुर्वेद का अद्भुत संगम आज के आधुनिक युग में जहाँ हम वापस अपनी जड़ों की ओर लौट रहे हैं, वहीं आयुर्वेद और योग के क्षेत्र में आचार्य बालकृष्ण जी का योगदान किसी मील के पत्थर से कम नहीं है। उनके द्वारा रचित पुस्तकें केवल कागज़ का संकलन नहीं, बल्कि वर्षों के गहन अनुसंधान (Research) और वैज्ञानिक प्रमाणों (Scientific Evidence) का निचोड़ हैं।

वैज्ञानिक अनुसंधान पर आधारित साहित्य

आचार्य श्री की लेखनी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उनकी प्रत्येक पुस्तक वैज्ञानिक प्रमाणों (Scientific Proofs) के साथ आती है। वे केवल प्राचीन ज्ञान को दोहराते नहीं हैं, बल्कि उसे आधुनिक प्रयोगशालाओं में परीक्षित कर, वैज्ञानिक तथ्यों के साथ पाठकों के सामने रखते हैं। यही कारण है कि उनकी पुस्तकें आज के शिक्षित और तार्किक समाज के बीच अत्यंत लोकप्रिय हैं।

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आचार्य बालकृष्ण जी की पुस्तकें आयुर्वेद, जड़ी-बूटी और योग के रहस्यों को उजागर करती हैं। उनके साहित्य में निम्नलिखित बिंदु प्रमुखता से मिलते हैं:- अद्भुत और खोजपूर्ण सामग्री: उनकी पुस्तकें दुर्लभ जड़ी-बूटियों और उनके गुणों पर आधारित हैं, जो सदियों पुराने ज्ञान को सरल भाषा में उपलब्ध कराती हैं। प्रमाणिक उपचार: 'विश्व आयुर्वेद कोष' (World Herbal Encyclopedia) जैसे महान ग्रंथ इस बात का प्रमाण हैं कि उन्होंने आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान दी है। स्वस्थ जीवन का मार्ग: योग और प्राणायाम पर उनकी पुस्तकें केवल क्रियाएँ नहीं सिखातीं, बल्कि उनके शरीर पर होने वाले सूक्ष्म प्रभावों की वैज्ञानिक व्याख्या भी करती हैं।

स्वाध्याय: जीवन परिवर्तन की कुंजी

कहा जाता है कि अच्छी पुस्तकें हजारों मित्रों के बराबर होती हैं। आचार्य जी के साहित्य का स्वाध्याय (Self-study) करना हर उस व्यक्ति के लिए अनिवार्य है जो प्राकृतिक चिकित्सा और भारतीय संस्कृति में विश्वास रखता है।"आचार्य बालकृष्ण जी का साहित्य पढ़ने का अर्थ है—अपने शरीर, मन और स्वास्थ्य को गहराई से समझना।" यदि आप अपने जीवन में पूर्ण स्वास्थ्य और वैचारिक स्पष्टता चाहते हैं, तो आचार्य बालकृष्ण जी की पुस्तकों को अपने पुस्तकालय का हिस्सा अवश्य बनाएँ। उनकी पुस्तकें न केवल ज्ञान का भंडार हैं, बल्कि एक स्वस्थ राष्ट्र के निर्माण का आधार भी हैं।
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