आयुर्वेद सिद्धान्त रहस्य
Ayurved Siddhant Rahasya

Original price was: ₹250.00.Current price is: ₹180.00.

AUTHOR: Acharya Balkrishna (आचार्य बालकृष्ण)
SUBJECT: Ayurved Siddhant Rahasya
|Ayurveda Principle Secrets (Science And Philosophy Of Total Health)
CATEGORY: Ayurveda
LANGUAGE: Hindi
EDITION: 2013
PAGES: 300
ISBN: 8189235478
PACKING: Paperback
WEIGHT: 615 g.
Description

प्रस्तुत पुस्तक “ आयुर्वेद सिद्धांत रहस्य “ विश्व की प्राचीनतम चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद के मूल सिद्धांतों एवं उसकी वैज्ञानिकता को सरल भाषा में संपूर्ण तथ्यों एवं प्रमाणों के साथ समझाने वाली अद्वितीय पुस्तक हैं l

मनुष्य मात्र का मन एवं अपनी प्रकृति के साथ संतुलन स्थापित करके संपूर्ण स्वास्थ्य प्राप्ति के लिए, रोगमुक्त होने के सरल व वैज्ञानिक तथ्यों तथा सार्वभौमिक सिद्धांतों को सरल रूप में प्रदर्शित करने वाला शोधपरक उच्चतम कोटि का ग्रन्थ हैं l

आयुर्वेद के सन्दर्भों को सरलता से समझाने के लिए प्राचीन शैली में मौलिक चिंतन के आधार पर हस्तनिर्मित उच्च कोटि के 29 चित्रों के द्वारा आयुर्वेद के सिद्धांतों व प्राचीन दृष्टिकोण को वैज्ञानिक रूप से प्रदर्शित करने वाली यह विश्व की प्रथम पुस्तक हैं  l

इस पुस्तक में विभिन्न व्याधियों के लिए स्वानुभूत आयुर्वेदिक उपायों (योगों) के प्रस्तुत करने के साथ-साथ आहार, विहार, ऋतूचर्या, योग व साधना की विधि के साथ संपूर्ण तथ्यों की सहज व व्यवहारिक व्याख्या की गई है l

वास्तव में इस पुस्तक में बताएं गए उपायों व समाधानों का पालन करके विश्व पटल पर स्वास्थ्य एवं चिकित्सा के क्षेत्र में एक आकर्षक एवं क्रांतिकारी परिवर्तन हो सकता हैं इस पुस्तक में बतेयें गए उपायों को अपनाकर घर का शुन्य प्रतिशत (0%) हेल्थ बजट का एक आदर्श कीर्तिमान बनाया जा सकता हैं

आयुर्वेद सिद्धान्त रहस्य : गागर में सागर

प्रत्येक व्यक्ति जानना चाहता है कि उसकी मूल प्रकृति क्या है? उसके शरीर में त्रिदोष, सप्तधातु एवं ओज की स्थिति क्या है? त्रिदोष का संतुलन कैसे होता है? सप्तधातु एवं ओज की वृद्धि के उपाय क्या हैं? स्वस्थ एवं लम्बी आयु के लिए रसायन-सेवन की प्रक्रिया क्या है, बल की अत्यन्त वृद्धि हेतु वाजीकरण के लिए क्या करना चाहिए? ऐसे बहुत से प्रश्न हैं, जिनका प्रामाणिक व वैज्ञानिक समाधान व्यक्ति खोजना चाहता है।

रोग के मूल कारण व उसके स्थायी निवारण के बारे में जानने की उत्सुकता भी सभी के मन में होती है। इसके लिए वर्षों तक मेडिकल साइंस की पढ़ाई करना अथवा चरक, सुश्रुत, एवं धन्वन्तरि निघण्टु आदि आयुर्वेद के ग्रन्थों एवं वेदों का अध्ययन करना यह सबके लिए संभव नहीं है।

वर्तमान युग में वेदों से लेकर आयुर्वेद तक की आर्षज्ञान-परम्परा के सबसे प्रामाणिक विद्वान् महापुरुष श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी आयुर्वेद के पुनरुद्धार व प्रचार-प्रसार में जुटे हैं, जिनमें महर्षि चरक, सुश्रुत एवं धन्वन्तरि आदि सब ऋषियों का ज्ञान समग्र रूप से समाहित है।

श्रद्धेय आचार्यश्री ऋषि-परम्परा के प्रतिनिधि के रूप में अहर्निश निष्कामभाव से करोड़ों लोगों की सेवा में लगे हैं। आपने आयुर्वेद के सारतत्त्व या तत्त्वज्ञान को ‘आयुर्वेद सिद्धान्त रहस्य’ पुस्तक में अत्यन्त पुरुषार्थ-पूर्वक संकलित किया है, मानो गागर में सागर ही भर दिया है।

कोई भी व्यक्ति इस पुस्तक का अध्ययन करके अपनी मूल प्रकृति, शरीर की विकृतियों एवं रोगों के निवारण के बारे में सरलता से समझ सकता है। आयुर्वेद के मूल सिद्धान्तों को पहली बार सचित्र रूप में एक जीवन्तता दी गई है। मेरा पूर्ण विश्वास है कि जो व्यक्ति इस पुस्तक को एक बार ध्यान से पढ़ लेगा वह शतायु या पूर्णायु अवश्य होगा। प्रकृति, आहार-विहार एवं आरोग्य के बारे में मूलभूत बोध हेतु सभी नागरिकों को इस पुस्तक का अध्ययन अवश्य करना चाहिए।

इस पुस्तक को प्रत्येक घर-परिवार एवं गाँव तक पहुँचाया जाए, ऐसा प्रयत्न होना चाहिए; जिससे अधिक से अधिक लोगों को इसका लाभ प्राप्त हो सके। आज रोगों के कारण जहाँ करोड़ों लोगों की प्रतिवर्ष अकाल मृत्यु हो रही है, वहीं मंहगी व अनावश्यक दवा, अनावश्यक ऑपरेशन, गैरजरूरी व मंहगे परीक्षण एवं मंहगे अस्पतालों ने चिकित्सा को जनसामान्य की पहुँच से दूर कर दिया है तथा उपचार के नाम पर एक ऐसे अत्याचार का चक्रब्यूह चल रहा है, जिसमें फंसे व्यक्ति का पीछा मृत्यु होने पर ही छूट पाता है।

इस पुस्तक के अध्ययन से लोग उपचार के नाम पर चल रहे अत्याचार से बचेंगे तथा अपने आरोग्य की रक्षा स्वयं करने में समर्थ होंगे। हमारा तो यह उद्घोष ही है कि- आरोग्य हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है। आप स्वयं इस पुस्तक को पढ़ें तथा अधिक से अधिक लोगों को इसे पढ़ने के लिए प्रेरित कर सभी के लिए आरोग्यदान का पुण्य अर्जित करें।

सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः।

सभी के सुखमय आरोग्य की मंगल कामना के साथ, आपका

स्वामी रामदेव
दिव्य योग मंदिर, हरिद्वार

Additional information
Weight620 g
Dimensions24 × 18.4 cm
Author
Language
Reviews (0)

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “आयुर्वेद सिद्धान्त रहस्य
Ayurved Siddhant Rahasya”

Your email address will not be published. Required fields are marked *

About Acharya Balkrishan
आचार्य बालकृष्ण का दिव्य साहित्य आधुनिक विज्ञान और आयुर्वेद का अद्भुत संगम आज के आधुनिक युग में जहाँ हम वापस अपनी जड़ों की ओर लौट रहे हैं, वहीं आयुर्वेद और योग के क्षेत्र में आचार्य बालकृष्ण जी का योगदान किसी मील के पत्थर से कम नहीं है। उनके द्वारा रचित पुस्तकें केवल कागज़ का संकलन नहीं, बल्कि वर्षों के गहन अनुसंधान (Research) और वैज्ञानिक प्रमाणों (Scientific Evidence) का निचोड़ हैं।

वैज्ञानिक अनुसंधान पर आधारित साहित्य

आचार्य श्री की लेखनी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उनकी प्रत्येक पुस्तक वैज्ञानिक प्रमाणों (Scientific Proofs) के साथ आती है। वे केवल प्राचीन ज्ञान को दोहराते नहीं हैं, बल्कि उसे आधुनिक प्रयोगशालाओं में परीक्षित कर, वैज्ञानिक तथ्यों के साथ पाठकों के सामने रखते हैं। यही कारण है कि उनकी पुस्तकें आज के शिक्षित और तार्किक समाज के बीच अत्यंत लोकप्रिय हैं।

योग और आयुर्वेद का खोजपूर्ण संकलन

आचार्य बालकृष्ण जी की पुस्तकें आयुर्वेद, जड़ी-बूटी और योग के रहस्यों को उजागर करती हैं। उनके साहित्य में निम्नलिखित बिंदु प्रमुखता से मिलते हैं:- अद्भुत और खोजपूर्ण सामग्री: उनकी पुस्तकें दुर्लभ जड़ी-बूटियों और उनके गुणों पर आधारित हैं, जो सदियों पुराने ज्ञान को सरल भाषा में उपलब्ध कराती हैं। प्रमाणिक उपचार: 'विश्व आयुर्वेद कोष' (World Herbal Encyclopedia) जैसे महान ग्रंथ इस बात का प्रमाण हैं कि उन्होंने आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान दी है। स्वस्थ जीवन का मार्ग: योग और प्राणायाम पर उनकी पुस्तकें केवल क्रियाएँ नहीं सिखातीं, बल्कि उनके शरीर पर होने वाले सूक्ष्म प्रभावों की वैज्ञानिक व्याख्या भी करती हैं।

स्वाध्याय: जीवन परिवर्तन की कुंजी

कहा जाता है कि अच्छी पुस्तकें हजारों मित्रों के बराबर होती हैं। आचार्य जी के साहित्य का स्वाध्याय (Self-study) करना हर उस व्यक्ति के लिए अनिवार्य है जो प्राकृतिक चिकित्सा और भारतीय संस्कृति में विश्वास रखता है।"आचार्य बालकृष्ण जी का साहित्य पढ़ने का अर्थ है—अपने शरीर, मन और स्वास्थ्य को गहराई से समझना।" यदि आप अपने जीवन में पूर्ण स्वास्थ्य और वैचारिक स्पष्टता चाहते हैं, तो आचार्य बालकृष्ण जी की पुस्तकों को अपने पुस्तकालय का हिस्सा अवश्य बनाएँ। उनकी पुस्तकें न केवल ज्ञान का भंडार हैं, बल्कि एक स्वस्थ राष्ट्र के निर्माण का आधार भी हैं।
Shipping & Delivery