अजीर्णामृतमञ्जरी
Ajirna Amrit Manjari

Original price was: ₹200.00.Current price is: ₹165.00.

Book Details:
  • Author: Acharya Balkrishan
  • Language: Hindi
  • Pages: 114
  • Edition: 2022
  • Cover: Paperback
  • ISBN: 8189235923
  • Weight: 192 Gms.
Description

भूमिका

आयुर्वेदीय वाङ्मय में ‘अजीर्णामृतमञ्जरी’ नामक एक लघु किन्तु अति महत्त्वपूर्ण रचना के उद्धरण यत्र-तत्र ग्रन्थों में दिखाई देते हैं। इस विषय में जानकारी करने पर विदित हुआ कि इसके चार संस्करण प्रकाशित भी हुए हैं। पहला प्रकाशन- ‘अजीर्णमञ्जरी’ (पण्डित दत्तराम माथुर कृत भाषाटीका सहित) वि० संवत् १९४२ में मथुरा से प्रकाशित हुआ था। इसमें ‘अजीर्णामृतमञ्जरी’ नामक प्राचीन रचना से पहले अनेक अजीर्ण-विषयक श्लोक जोड़ दिए हैं। जिससे यह पता नहीं चलता कि पीछे से जोड़ा अंश कौन-सा है तथा मूलभाग कौन-सा। इस संस्करण में कुछ पाठदोष व व्याख्यादोष भी रह गए हैं।

इसके अनन्तर दूसरा संस्करण ‘अजीर्णमञ्जरी’ (श्रीमत्पण्डितदत्तराम-विरचिता, निर्मला-व्याख्यया संवलिता) चौखम्बा आयुर्विज्ञान ग्रन्थमाला में नवीं संख्या पर प्रकाशित हुआ है। इसमें डा० ब्रह्मानन्द त्रिपाठी की हिन्दी-व्याख्या है। यह संस्करण पूर्व-संस्करण के आधार पर ही तैयार किया गया है। इस संस्करण में भी अनेक पाठदोष व व्याख्यादोष विद्यमान हैं। व्याख्याकार ने वास्तविक जानकारी के अभाव में इस प्राचीन रचना को पण्डितदत्तराम-विरचित ही माना है, जबकि वस्तुस्थिति यह है कि पण्डित दत्तराम माथुर ने प्राचीन रचना में कुछ आरम्भिक श्लोक जोड़कर भाषाटीका के साथ इसका प्रकाशन करवाया था।

‘अजीर्णमञ्जरी’ का तीसरा संस्करण ‘निघण्टुरत्नाकर’ के अन्त में मराठी अनुवाद के साथ छपा है। इसमें भी बहुत से पाठदोष हैं व श्लोकों की स्थिति भी अस्त-व्यस्त है। एक अन्य संस्करण तेलगू-भाषानुवाद के साथ प्रकाशित हुआ है। इसका आधार पण्डित दत्तराम द्वारा सम्पादित व प्रकाशित हिन्दी भाषाटीका वाली अजीर्णमञ्जरी ही है।

इस प्रकार इस रचना के विषय में प्रचलित भ्रान्ति को दूर करने तथा इसका शुद्धतम प्राचीन पाठ व्याख्या सहित प्रकाशित करने हेतु यह प्रयास किया गया है। इसके अन्तर्गत भारत के हस्तलेखागारों से ‘अजीर्णामृतमञ् जरी’ की २६ हस्तलिखित प्रतियां एकत्र की गईं। उनमें अहमदाबाद से प्राप्त एक प्रतिलिपि तो ३५० वर्ष पुरानी है। सभी उपलब्ध हस्तलिखित प्रतियों का अवधानपूर्वक अवलोकन कर पाठालोचनपूर्वक यह संस्करण तैयार किया गया है। पाठकों की सुविधा के लिए इसमें संस्कृत-व्याख्या व हिन्दी-व्याख्या भी दी गई है। पाठशोधन व सम्पादन हेतु प्रयुक्त प्रतिलिपियों का विवरण परिशिष्ट-३ में दिया गया है। परिशिष्ट भाग में १० उपयोगी परिशिष्ट दिए हैं, जो विषय-बोध व शोधकार्य में विशेष रूप से सहायक हैं।

रचयिता-
‘अजीर्णामृतमञ्जरी’ की हस्तलिखित प्रतियों में कहीं रचयिता का नाम ‘काशिनाथ’ मिलता है तथा कहीं ‘काशिराज’। इनमें पहला नाम ही उचित है। लिपिकरों के अनवधान से ‘काशिनाथ’ का ‘काशिराज’ हो गया है, जो ग्राह्य नहीं है। हस्तलिखित प्रतियों में जो कहीं-कहीं ‘काशिराज’ नाम लिखा है, उसे देख कर बहुत से लेखक इसे ‘काशिराज धन्वन्तरि’ कृत मानते हैं, परन्तु यह धारणा काल्पनिक व इतिहासविरुद्ध होने से ग्राह्य नहीं है।।

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About Acharya Balkrishan
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