वेदों में समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र और शिक्षाशास्त्र के सिद्धान्त सूत्र रूप में मिलते हैं ।
वेदों में समाजशास्त्र , अर्थशास्त्र और शिक्षाशास्त्र Vedao Mein Samajshashtra Arthashashtra Aur Sikshashashtra
₹300.00
ITEM CODE: | NZG298 |
AUTHOR: | डॉ. कपिलदेव द्विवेदी (DR. KAPILDEV DWIVEDI0 |
PUBLISHER: | VISHVABHARATI RESEARCH INSTITUTE, GYANPUR |
LANGUAGE: | HINDI |
EDITION: | 2010 |
ISBN: | 9788185246420 |
PAGES: | 253 |
COVER: | Bound |
OTHER DETAILS | 8.5 INCH X 5.5 INCH |
WEIGHT | 390 GM |
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प्रस्तुत ग्रन्थ में इन विषयों का ही विवेचनात्मक विवरण प्रस्तुत किया गया है ।
वेदों में इन विषयों से संबद्ध सामग्री किन्हीं विशेष सूक्तों में ही प्राप्य नहीं है अपितु बहुत अधिक बिखरी हुई है । उसका विषयानुसार क्रमबद्ध संकलन अतिक्लिष्ट कार्य है । मैंने प्रयत्न किया है कि इन विषयों से संबद्ध सामग्री जहाँ भी , जिस रूप में भी प्राप्य है , उसका पूर्णरूपेण संकलन किया जाए । विषय से संबद्ध कोई सामग्री छूटने न पावे ।
वेदों के विषय में मनु महाराज का यह कथन अत्यन्त सारगर्भित है कि
‘सर्वज्ञानमयो हि सः’ ( मनु ० २.७ ) अर्थात् वेदों में सभी विद्याओं के सूत्र विद्यमान हैं । वेदों में जहाँ धर्म , विज्ञान , दर्शन , आचारशास्त्र , नीतिशास्त्र , आयुर्वेद , अध्यात्म आदि से संबद्ध सामग्री प्रचुर मात्रा में मिलती है , वहीं समाजशास्त्र , अर्थशास्त्र और शिक्षाशास्त्र से संबद्ध सामग्री भी बहुलता से प्राप्त होती है ।
प्राक्कथन
वेद आर्यजाति के प्राण हैं । ये मानवमात्र के लिए प्रकाश – स्तम्भ हैं । विश्व को संस्कृति और सभ्यता का ज्ञान देने का श्रेय वेदों को है । वेद ही विश्व – वन्धुत्व , विश्व कल्याण और विश्व शान्ति के प्रथम उद्घोषक हैं ।
वेदों से ही आर्य संस्कृति का विकास हुआ है , जो विश्व को धर्म , ज्ञान , विज्ञान , आचार – विचार और सुख – शान्ति की शिक्षा देकर उसकी समुन्नति का मार्ग प्रशस्त करती हैं ।
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