दयानन्द सूक्ति और सुभाषित
Dayanand Sukti Aur Subhashit

100.00

AUTHOR: Swami Jagdishwaranand Sarswati (स्वामी जगदीश्वरानंद सरस्वती)
SUBJECT: Dayanand Sukti Aur Subhashit | दयानन्द सूक्ति और सुभाषित
CATEGORY: Swami Dayanand Granth
LANGUAGE: Hindi
EDITION: 2024
PAGES: 192
BINDING: Paper Back
WEIGHT: 216 g.
Description

भूमिका

महर्षि दयानन्द 19वीं शताब्दी के वेदों के सबसे बड़े विद्वान् थे। वे मन्त्रद्रष्टा ऋषि थे। महर्षि ने दस वर्ष के अल्पकाल में जहाँ सहस्त्रों व्याख्यान दिये, सैकड़ों शास्त्रार्थ किये, वहाँ विपुल साहित्य का भी निर्माण किया। महर्षि दयानन्द का साहित्य भारत की अमूल्य निधि है। महर्षि के ग्रन्थों ने कोटि-कोटि मानवों के मन-मन्दिरों को ज्ञानालोक से आलोकित किया है। महर्षि रचित ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका को पढ़कर पाश्चात्य विद्वान् मैक्समूलर को भी अपनी सम्मति परिवर्तित करनी पड़ी। महर्षि के ‘सत्यार्थ-प्रकाश’ ने कितने ही लोगों के मानसचक्षु खोल दिये।

उनके अन्य ग्रन्थ भी भारत की प्रसुप्त आत्मा को जाग्रत् करने का महान् कार्य कर रहे हैं। हमने महर्षि के विशाल, विपुल एवं गम्भीर साहित्य का मन्थन करके उसमें से कुछ रत्न निकालने का प्रयत्न किया है। लगभग तीन सौ रत्नों की एक माला गूँथकर हम पाठकों की सेवा में प्रस्तुत कर रहे हैं। यह माला कैसी है, इसका निर्णय तो पाठक ही कर सकेंगे।

इस पुस्तक में महर्षि के जीवन-परिचय के अतिरिक्त मेरा कुछ नहीं है। महर्षि के विचारों को उनकी ही भाषा में ज्यों-का-त्यों प्रस्तुत कर दिया है। कहीं-कहीं भाव को स्पष्ट करने के लिए एक आध शब्द इस [] बन्धनी द्वारा बढ़ाया गया है।

सर्वश्री गोविन्दराम हासानन्द के संचालक श्री विजयकुमार जी हार्दिक धन्यवाद के पात्र हैं जो अपने पिताजी की भाँति वैदिक साहित्य के प्रकाशन में लगे हुए हैं।

स्वामी जगदीश्वरानन्द सरस्वती

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