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चतुर्वेद गंगा लहरी Chatruveda Ganga Lahari
₹220.00
| AUTHOR: | Dr. Satyavrat Siddhantalankar (डॉ. सत्यव्रत सिद्धान्तालंकार) |
| SUBJECT: | Chatruveda Ganga Lahari | चतुर्वेद गंगा लहरी |
| CATEGORY: | Vedic Dharma |
| LANGUAGE: | Hindi – English |
| EDITION: | 2019 |
| PAGES: | 456 |
| ISBN: | N/A |
| PACKING: | Hard Cover |
| WEIGHT: | 540 GRMS |
Additional information
| Weight | 540 g |
|---|---|
| Author | Dr. Satyavrat Siddhantalankar |
| Language | Hindi-English |
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About Dr. Satyavrat Siddhantalankar
प्रो० सत्यव्रत सिद्धान्तालंकार (Dr. Satyavrat Siddhantalankar) ने लगभग 40 विशाल ग्रन्थों की रचना की। ये पुस्तकें शिक्षा, मनोविज्ञान, समाजशास्त्र, सामाजिक चिन्तन, उपनिषद, संस्कार, वैदिक विचार, गीता, होम्योपैथी आदि विविध विषयों पर आधारित हैं। कुछ ग्रन्थ हिन्दी तथा अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध हैं। एक बार मोरारजी देसाई ने उनकी पुस्तकों को देखकर आश्चर्यपूर्वक कहा था-'क्या आपने एक पुस्तकालय ही लिख डाला है?'
उनका जन्म 5 मार्च 1898 को लुधियाना में हुआ। मात्र 7 वर्ष की आयु में उनका प्रवेश गुरुकुल काङ्गड़ी में हुआ। उन्होंने वहीं से 'सिद्धान्तालंकार' की उपाधि विशिष्ट श्रेणी में प्राप्त की और आगे चलकर उसी संस्थान में प्राध्यापक तथा कुलपति बने। उनकी धर्मपत्नी श्रीमती चंद्रावती भी एक शिक्षाविद थीं। दोनों ही स्वतन्त्रता संग्राम में सक्रिय रहे और कारावास का कष्ट सहा। दोनों को राज्यसभा के लिए मनोनीत किया गया तथा अपने लेखन कार्य के लिए अनेक सम्मानों से अलंकृत किया गया। उनका दीर्घ कार्यकाल उच्च उपलब्धियों से परिपूर्ण रहा।
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