आयुर्वेद जड़ी बूटी रहस्य
Ayurveda jadi buti Rahasya (set of 3 Vol.)

Original price was: ₹2,100.00.Current price is: ₹1,250.00.

AUTHOR: Acharya Balkrishan
SUBJECT: आयुर्वेद जड़ी बूटी रहस्य – Ayurveda jadi buti Rahasya
CATEGORY: Ayurveda
PAGES: 1074
LANGUAGE: Hindi
BINDING: Paperback
VOLUMES: 3 Volumes
Description

यह सर्वविदित है कि भूमंडल पर अब तक जितनी भी चिकित्सा पद्धतियाँ विकसित हुई है, उनमें सबसे प्राचीन पद्धति का आविर्भाव सर्वप्रथम भारत में आयुर्वेद के रूप में हुआ था यह मुख्यतः वानस्पतिक पौधों पर आधारित चिकित्सा पद्धति है सम्पूर्ण विश्व में आज विविध चिकित्सा पद्धतियों का प्रचलन हैं |

चिकित्सा क्षेत्र में अनेक अनुसन्धान हुए है तथा चिकित्सा विज्ञान ने बहुत सी नई उपलब्धियां भी प्राप्त की है l इन सबके उपरांत भी आज दिनया की सबसे बड़ी आबादी पौधों पर आधारित चिकित्सा पद्धति पर ही निर्भर है विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार आज भी लगभग 75-80 प्रतिशत जनसंख्या औषधीय पादपों पर आधारित चिकित्सा पद्धतियों का आंशिक या पूर्णतया उपयोग कर रही है

आयुर्वेद हमें उचित आहार-विहार, उचित दिनचर्या, ऋतूचर्या, सद्वृत्तानुष्ठन (सदाचार पालन) तथा ज्ञान, तप व योग में तत्परता द्वारा तन-मन के रोगों से बचाव का मार्ग दिखता हैं l कदाचित रोग होने पर पूर्वोक्त उपायों के साथ ही रोगों की चिकत्सा-विधि भी सिखाता हैं

आयुर्वेद की परंपरा के अंतर्गत भारत में औषधीय पौधों के गुणों का ज्ञान व उनसे सम्बंधित चिकित्सा की जानकारी वैदिक काल से ही बहुत समृद्ध रही हैं | ऋग्वेद मुख्य रूप से आयुर्वेद का सबसे प्राचीन उद्गम स्त्रोत है |

इसके अनंतर अथर्ववेद में वनोषधियों द्वारा की जाने वाले चिकित्सा के विषय में विपुल व रोचक सामग्री मिलती हैं l वेदों की इस परंपरा में आयुर्वेद का प्रादुर्भाव हुआ, जो क्रान्तदर्शिनी ऋषि-प्रज्ञा का दिव्य एवं अमृतमय उत्स है |

आधि-व्याधि से पीड़ित मानवता का शान्तिप्रद आश्रय है जन-जन के रोग शोक को हरने वाले शाश्वत शरण्य है l भारतीय ऋषियों में मानव मात्र के कल्याण के लिए इसे वैज्ञानिक रूप में प्रतिष्ठित किया हैं |

भारत में ऋषि मुनि प्रायः जंगलों में स्थापित आश्रमों व गुरुकुलों में ही निवास करते थे l वहां जड़ी बूटियों का अनुसन्धान व उपयोग निरंतर करते रहते थे | जनसाधारण का भी इनसे सीधा जुडाव था | वन उपवन की बहुलता वाले इस देश में प्रकृति एवं पेड़ पौधों के प्रति गहन आत्मीयता रही है |

इस कारण इनका परिचय व उपयोग वनवासी व ग्रामवासी जनों से लेकर उच्चवर्ग तक प्रचलित था | छोटे-छोटे ग्राम एवं वस्तियों में जड़ी बूटियों के आधार पर चिकित्सा करने वाले वैद्यों के द्वारा भी इनकी जानकारी एवं उपयोग जन-जन तक प्रसारित हो चूका था |

अशोक के शिलालेखों से विदित होता है कि सार्वजनिक स्थानों पर एवं राजमार्गों के साथ चिकित्सापयोगी जड़ी-बूटियां विपुल मात्र में लगे जाती थी, जो जन-जन के लिए चिकित्सा हेतु बहुत सहज रूप में सुलभ रहती थी | इस प्रकार उत्तम परिपाक एवं रस से संपन्न वनौषधियों से जनता की चिकित्सा की जाती थी |

इनका प्रभाव भी चमत्कारी होता था क्योकि ये ताजा एवं रसवीर्य संपन्न होती थी |

आयुर्वेद जड़ी बूटी रहस्य पुस्तक के प्रथम प्रकाशन के रूप में सन् 2005 में हमने जो एक छोटा सा प्रयास किया था, उसकी व्यापकता स्वीकार्यता से उत्साहित होकर ही इस बार इस ग्रन्थ को विस्तृत व सुसज्जित रूप देकर तीन खण्ड में प्रकाशित किया है |

पूर्वप्रकाशित पुस्तक लाहों की संख्या में प्रसारित हुई थी | आस्था चेनल के माध्यम से भी आयुर्वेदीय जड़ी बूटी चिकित्सा बहुत लोकप्रिय हुई है | अत एव जनता की मांग को देखता हुए प्रस्तुत संस्करण विस्तृत सामग्री के साथ तीन खण्डों में प्रकशित किया गया है |

इसमें 550 से अधिक औषधीय पेड़ पौधों का विवरण आधुनिक वैज्ञानिक एवं आयुर्वेदीय दृष्टिकोण से विस्तृत रूप में प्रस्तुत किया है l साथ में सुगम चिकित्सीय प्रयोगों का वर्णन करते हुए इसे सर्वागीण बनाने का प्रयास किया है |

Additional information
Weight4000 g
Dimensions27.8 × 21 × 10 cm
Author
Language
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About Acharya Balkrishan
आचार्य बालकृष्ण का दिव्य साहित्य आधुनिक विज्ञान और आयुर्वेद का अद्भुत संगम आज के आधुनिक युग में जहाँ हम वापस अपनी जड़ों की ओर लौट रहे हैं, वहीं आयुर्वेद और योग के क्षेत्र में आचार्य बालकृष्ण जी का योगदान किसी मील के पत्थर से कम नहीं है। उनके द्वारा रचित पुस्तकें केवल कागज़ का संकलन नहीं, बल्कि वर्षों के गहन अनुसंधान (Research) और वैज्ञानिक प्रमाणों (Scientific Evidence) का निचोड़ हैं।

वैज्ञानिक अनुसंधान पर आधारित साहित्य

आचार्य श्री की लेखनी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उनकी प्रत्येक पुस्तक वैज्ञानिक प्रमाणों (Scientific Proofs) के साथ आती है। वे केवल प्राचीन ज्ञान को दोहराते नहीं हैं, बल्कि उसे आधुनिक प्रयोगशालाओं में परीक्षित कर, वैज्ञानिक तथ्यों के साथ पाठकों के सामने रखते हैं। यही कारण है कि उनकी पुस्तकें आज के शिक्षित और तार्किक समाज के बीच अत्यंत लोकप्रिय हैं।

योग और आयुर्वेद का खोजपूर्ण संकलन

आचार्य बालकृष्ण जी की पुस्तकें आयुर्वेद, जड़ी-बूटी और योग के रहस्यों को उजागर करती हैं। उनके साहित्य में निम्नलिखित बिंदु प्रमुखता से मिलते हैं:- अद्भुत और खोजपूर्ण सामग्री: उनकी पुस्तकें दुर्लभ जड़ी-बूटियों और उनके गुणों पर आधारित हैं, जो सदियों पुराने ज्ञान को सरल भाषा में उपलब्ध कराती हैं। प्रमाणिक उपचार: 'विश्व आयुर्वेद कोष' (World Herbal Encyclopedia) जैसे महान ग्रंथ इस बात का प्रमाण हैं कि उन्होंने आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान दी है। स्वस्थ जीवन का मार्ग: योग और प्राणायाम पर उनकी पुस्तकें केवल क्रियाएँ नहीं सिखातीं, बल्कि उनके शरीर पर होने वाले सूक्ष्म प्रभावों की वैज्ञानिक व्याख्या भी करती हैं।

स्वाध्याय: जीवन परिवर्तन की कुंजी

कहा जाता है कि अच्छी पुस्तकें हजारों मित्रों के बराबर होती हैं। आचार्य जी के साहित्य का स्वाध्याय (Self-study) करना हर उस व्यक्ति के लिए अनिवार्य है जो प्राकृतिक चिकित्सा और भारतीय संस्कृति में विश्वास रखता है।"आचार्य बालकृष्ण जी का साहित्य पढ़ने का अर्थ है—अपने शरीर, मन और स्वास्थ्य को गहराई से समझना।" यदि आप अपने जीवन में पूर्ण स्वास्थ्य और वैचारिक स्पष्टता चाहते हैं, तो आचार्य बालकृष्ण जी की पुस्तकों को अपने पुस्तकालय का हिस्सा अवश्य बनाएँ। उनकी पुस्तकें न केवल ज्ञान का भंडार हैं, बल्कि एक स्वस्थ राष्ट्र के निर्माण का आधार भी हैं।
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