आयुर्वेद जड़ी बूटी रहस्य
Ayurveda Jadi Buti Rahasya (Hard Cover)

Original price was: ₹1,999.00.Current price is: ₹1,800.00.

AUTHOR: Acharya Balakrishna (आचार्य बालकृष्ण)
SUBJECT: Ayurveda Jadi Buti Rahasya (Hard Cover) | आयुर्वेद जड़ी बूटी रहस्य
CATEGORY: Ayurveda
LANGUAGE: Hindi
EDITION: 2022
PAGES: 1185
ISBN: 9789395287609
BINDING: Hardcover
WEIGHT: 3200 g.
Description

विश्व की प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों में आयुर्वेद एक प्रामाणिक चिकित्सा-पद्धति है जो मुख्यतः वनस्पतियों पर आधारित है। विश्व के प्राचीनतम ग्रन्थ ऋग्वेद एवं अथर्ववेद में वनौषधियों के द्वारा की जाने वाली चिकित्सा का विस्तृत एवं प्रामाणिक वर्णन मिलता है। प्राचीन काल में आयुर्वेद को विकसित करने में चरक, सुश्रुत और धन्वन्तरि आदि अनेक महापुरुषों का बड़ा योगदान है जिन्होंने आयुर्वेद को सुव्यवस्थित, प्रामाणिक एवं विज्ञान-आधारित चिकित्सा पद्धति के रूप में प्रतिष्ठापित करने का महान् कार्य किया। विश्वभर में प्रचलित जड़ी-बूटी-आश्रित अनेक विधाओं में आयुर्वेद की विधा न केवल औषधि-विज्ञान है अपितु इसके चिकित्सा-सिद्धान्त भी बहुत गहन व विस्तृत हैं तथा हजारों वर्ष व्यतीत होने के बाद भी अद्यावधि तक पूर्ण प्रासंगिक हैं।

आज चिकित्सा क्षेत्र में अनेक अनुसन्धान हुए हैं तथा चिकित्सा-विज्ञान ने बहुत सी नर्इ उपलब्धियाँ भी प्राप्त की हैं। इन सबके उपरान्त भी आज दुनिया की सबसे बड़ी आबादी पौधों पर आधारित चिकित्सा पद्धति पर ही निर्भर है। ‘विश्व स्वास्थ्य संगठन’ के अनुसार आज भी लगभग 75-80 प्रतिशत जनसंख्या औषधीय पादपों पर आधारित चिकित्सा पद्धतियों का आंशिक या पूर्णतया उपयोग कर रही है तथा हृदय, वृक्क एवं यकृत् आदि की अनेक बीमारियों में आधुनिक चिकित्सा की अपेक्षा वनौषधि चिकित्सा के द्वारा अधिक अच्छे परिणाम प्राप्त हो रहे हैं।

प्राचीन काल से ही भारत कृषि एवं ऋषि संस्कृति का देश रहा है। ऋषि-मुनि वनौषधि चिकित्सा के क्षेत्र में निरन्तर अनुसन्धान करते रहे तथा इसका लाभजनसाधारण को प्राप्त हुआ। वनौषधियों के प्रयोग की सुगमता के लिए आयुर्वेद में इनका वैज्ञानिकतापूर्ण ढंग से विविध तरह के वर्गों एवं गणों के रूप में वर्गीकरण एवं नामकरण किया गया जिससे लोगों को इनसे ज्यादा लाभ मिल सके। इस प्रकार इनका उपयोग मानवमात्र के हित के लिए छोटे-छोटे ग्राम-बस्तियों से लेकर राजा-महाराजाओं तक प्रचलित रहा। आयुर्वेद में समय-समय पर जो अनेक अनुसन्धान हुए उनमें जान्तव द्रव्य, समुद्रज द्रव्य, खनिज द्रव्य तथा अनेक तरह की पंचकर्म, षद्धर्म, अग्निकर्म आदि क्रियाओं के साथ में चिकित्सा के लिए वनौषधि-आश्रित विधा को प्रमुखता दी गई।

भारत में आयुर्वेद चिकित्सा का जनमानस पर इतना गहरा प्रभाव रहा है कि अनेक प्राचीन-अर्वाचीन चिकित्सा पद्धतियों के होने के उपरान्त भी नहीं की अधिकांश जनता का जड़ी-बूटियों पर आश्रित चिकित्सा के प्रति श्रद्धाभाव व दृढ विश्वास आज भी अक्षुण्ण रूप में दिखता है। परम्परागत जड़ी-बूटी चिकित्सा के अनुभवों का विशाल भण्डार देश के ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्रों में अब भी पाया जाता है, किन्तु इस परम्परागत ज्ञानराशि को सुरक्षित करने के संतोषजनक उपाय अभी तक नहीं हुए हैं।

इसी अभाव की पूर्ति हेतु एक ग्रन्थ के संकलन की आवश्यकता अनुभव की गयी जिसके परिणामस्वरूप आयुर्वेद जड़ी-बूटी रहस्य नामक ग्रन्थ की रचना की गयी है। सन् 2005 में इसका प्रथम संस्करण प्रकाशित हुआ तथा उसके बाद इसके अनेक संस्करण प्रकाशित हो चुके हैं। लोगों के द्वारा इसकी स्वीकार्यता की देखते हुए इसे परिष्कृत एवं संशोधित रूप में पुनः प्रकाशित किया जा रहा है।

प्रस्तुत संस्करण की विशेषताएँ

> सामान्यतः सहजता से सुलभ किन्तु औषधीय गुणों में महत्वपूर्ण तथा विषाक्तता से रहित 439 पादपों के स्वरूप एवं उनके उपयोग का अच्छी तरह वर्णन किया गया है।

> आयुर्वेद का यह प्रथम ग्रन्थ है जिसमें हस्तनिर्मित छायाचित्र दिए गए हैं।

> प्रथम बार वैदिक पादप बर्गिकी के अन्तर्गत (संस्कृत-भापाश्रित द्विनामपद्धति पर आधारित) पादपों के वैदिक नामों को दिया गया है।

इस संस्करण में जड़ी-बूटियों का वर्णन करते हुए जहां प्राचीन ऋषियों एवं आचार्यों के ग्रन्थों का आश्रय लिया गया है वहीं अर्वाचीन लेखकों का भी सहयोग लिया गया है, अतः में सभी के प्रति कृतज्ञता प्रकट करता हूँ। इस नवीन संस्करण की सज्जा में विशिष्ट सौहार्दपूर्ण योगदान के लिये सभी सहयोगी जनों को मेरी शुभकामनाएं।

परमपूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज के प्रति में श्रद्धावनत हूँ जिनके नेतृत्व में योग एवं आयुर्वेद के पुनरुद्धार एवं प्रचार-प्रसार का विराट उद्यम चल रहा है। श्रद्धेय स्वामी जी महाराज के मार्गनिर्देशन, सत्प्रेरणा एवं आशीर्वाद से यह ग्रन्थ पूर्णता को प्राप्त हुआ है जिनके प्रति में नतमस्तक हैं।

आशा है यह ग्रन्थ जनसाधारण में आयुर्वेद के प्रति चेतना जागृत कर आरोग्य प्रदान करने में सहायक सिद्ध होगा। इसी शुभकामना के साथ यह ग्रन्थ लोकहितार्थ समर्पित करता हूँ।

आचार्य बालकृष्ण

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Weight3200 g
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About Acharya Balkrishan
आचार्य बालकृष्ण का दिव्य साहित्य आधुनिक विज्ञान और आयुर्वेद का अद्भुत संगम आज के आधुनिक युग में जहाँ हम वापस अपनी जड़ों की ओर लौट रहे हैं, वहीं आयुर्वेद और योग के क्षेत्र में आचार्य बालकृष्ण जी का योगदान किसी मील के पत्थर से कम नहीं है। उनके द्वारा रचित पुस्तकें केवल कागज़ का संकलन नहीं, बल्कि वर्षों के गहन अनुसंधान (Research) और वैज्ञानिक प्रमाणों (Scientific Evidence) का निचोड़ हैं।

वैज्ञानिक अनुसंधान पर आधारित साहित्य

आचार्य श्री की लेखनी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उनकी प्रत्येक पुस्तक वैज्ञानिक प्रमाणों (Scientific Proofs) के साथ आती है। वे केवल प्राचीन ज्ञान को दोहराते नहीं हैं, बल्कि उसे आधुनिक प्रयोगशालाओं में परीक्षित कर, वैज्ञानिक तथ्यों के साथ पाठकों के सामने रखते हैं। यही कारण है कि उनकी पुस्तकें आज के शिक्षित और तार्किक समाज के बीच अत्यंत लोकप्रिय हैं।

योग और आयुर्वेद का खोजपूर्ण संकलन

आचार्य बालकृष्ण जी की पुस्तकें आयुर्वेद, जड़ी-बूटी और योग के रहस्यों को उजागर करती हैं। उनके साहित्य में निम्नलिखित बिंदु प्रमुखता से मिलते हैं:- अद्भुत और खोजपूर्ण सामग्री: उनकी पुस्तकें दुर्लभ जड़ी-बूटियों और उनके गुणों पर आधारित हैं, जो सदियों पुराने ज्ञान को सरल भाषा में उपलब्ध कराती हैं। प्रमाणिक उपचार: 'विश्व आयुर्वेद कोष' (World Herbal Encyclopedia) जैसे महान ग्रंथ इस बात का प्रमाण हैं कि उन्होंने आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान दी है। स्वस्थ जीवन का मार्ग: योग और प्राणायाम पर उनकी पुस्तकें केवल क्रियाएँ नहीं सिखातीं, बल्कि उनके शरीर पर होने वाले सूक्ष्म प्रभावों की वैज्ञानिक व्याख्या भी करती हैं।

स्वाध्याय: जीवन परिवर्तन की कुंजी

कहा जाता है कि अच्छी पुस्तकें हजारों मित्रों के बराबर होती हैं। आचार्य जी के साहित्य का स्वाध्याय (Self-study) करना हर उस व्यक्ति के लिए अनिवार्य है जो प्राकृतिक चिकित्सा और भारतीय संस्कृति में विश्वास रखता है।"आचार्य बालकृष्ण जी का साहित्य पढ़ने का अर्थ है—अपने शरीर, मन और स्वास्थ्य को गहराई से समझना।" यदि आप अपने जीवन में पूर्ण स्वास्थ्य और वैचारिक स्पष्टता चाहते हैं, तो आचार्य बालकृष्ण जी की पुस्तकों को अपने पुस्तकालय का हिस्सा अवश्य बनाएँ। उनकी पुस्तकें न केवल ज्ञान का भंडार हैं, बल्कि एक स्वस्थ राष्ट्र के निर्माण का आधार भी हैं।
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