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रूचिवधू गल रत्नमाला Ruchivadhu Gala Ratana Mala
₹110.00
- By :Acharya Balkrishan
- Subject :Ruchivadhu Gala Ratana Mala
- Edition :2014
- ISBN# :890404980094
- Pages :130
- Binding :PAPERBACK
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प्राचीन काल से भारत वर्ष में पाकशास्त्रीय ग्रन्थ-रचना की परम्परा रही है l इन ग्रंथो में पाकविधि के साथ भोज्य वस्तुओं के गुण-धर्मं, प्रभाव व रोगविशेष में उनकी उपादेयता का वर्णन भी मिलता हैं l इस प्रकार पाकशास्त्रीय ग्रंथों में आयुर्वेदीय निर्देश भी रहते हैं l अतः प्राचीन पाकशास्त्रीय ग्रन्थ आयुर्वेद से घनिष्ठतया सम्बन्ध हैं l इनमें जहाँ उत्तमोत्तम स्वादिष्ट व्यंजनों के बनाने की विधियाँ प्रस्तुत की हैं, वहीँ स्वास्थ्य के लिए उनकी उपयोगिता का भी विधियाँ प्रस्तुत की हैं, वहीँ स्वास्थ्य के लिए पथ्य रूप में विशिष्ट प्रकार के कृतान्न (ओदन, सूप, शाक इत्यादि पके भोजन) का विवेचन भी इन ग्रन्थों में मिलता हैं l
पाकशास्त्र के ग्रंथों में राजा नल व पांडूपुत्र भीम द्वारा रचित पाकशास्त्र का उल्लेख प्राचीन साहित्य में अनेक स्थलों पर मिलता है l अनेक प्राचीन रचनाकारों ने गौरीमत व् नलमत नामक पाकशास्त्रीय ग्रंथों का भी उल्लेख भी किया हैं l भोज-रचित पाकशास्त्रीय ग्रन्थ की चर्चा भी अनेक ग्रंथों में मिलती हैं l
अजीर्णामृत-मंजरी की संस्कृत टीका में भी भीम-भोजनम् नामक एक पाकशास्त्रीय ग्रन्थ के उद्धरण मिलते हैं l भारत के कुछ हस्तलेखागारों में भीमसेन-विचरित सूपशास्त्राम् भी उपलब्ध हैं l वर्तमान में कुछ पाकशास्त्रीय ग्रन्थ प्रकाशित रूप में भी सुलभ हैं, यथा-पाकदर्पण जो राजा नल द्वारा रचित माना जाता है l १६वीं शती ई. में क्षेमशर्मा द्वारा रचित क्षेमक़ुतूहलनामक ग्रन्थ एक चर्चित पाकशास्त्रीय रचना हैं l १७वीं शती ई. में कोंकण (महाराष्ट्र) वासी पण्डित रघुनाथ सुरि द्वारा विचरित भोजन-कुतुहल नामक ग्रन्थ भी आयुर्वेद व पाकशास्त्र की मिली जुली रचना हैं l
| Weight | 200 g |
|---|---|
| Dimensions | 20.3 × 12.7 cm |
| Author | Acharya Balkrishan |
वैज्ञानिक अनुसंधान पर आधारित साहित्य
आचार्य श्री की लेखनी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उनकी प्रत्येक पुस्तक वैज्ञानिक प्रमाणों (Scientific Proofs) के साथ आती है। वे केवल प्राचीन ज्ञान को दोहराते नहीं हैं, बल्कि उसे आधुनिक प्रयोगशालाओं में परीक्षित कर, वैज्ञानिक तथ्यों के साथ पाठकों के सामने रखते हैं। यही कारण है कि उनकी पुस्तकें आज के शिक्षित और तार्किक समाज के बीच अत्यंत लोकप्रिय हैं।योग और आयुर्वेद का खोजपूर्ण संकलन
आचार्य बालकृष्ण जी की पुस्तकें आयुर्वेद, जड़ी-बूटी और योग के रहस्यों को उजागर करती हैं। उनके साहित्य में निम्नलिखित बिंदु प्रमुखता से मिलते हैं:- अद्भुत और खोजपूर्ण सामग्री: उनकी पुस्तकें दुर्लभ जड़ी-बूटियों और उनके गुणों पर आधारित हैं, जो सदियों पुराने ज्ञान को सरल भाषा में उपलब्ध कराती हैं। प्रमाणिक उपचार: 'विश्व आयुर्वेद कोष' (World Herbal Encyclopedia) जैसे महान ग्रंथ इस बात का प्रमाण हैं कि उन्होंने आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान दी है। स्वस्थ जीवन का मार्ग: योग और प्राणायाम पर उनकी पुस्तकें केवल क्रियाएँ नहीं सिखातीं, बल्कि उनके शरीर पर होने वाले सूक्ष्म प्रभावों की वैज्ञानिक व्याख्या भी करती हैं।स्वाध्याय: जीवन परिवर्तन की कुंजी
कहा जाता है कि अच्छी पुस्तकें हजारों मित्रों के बराबर होती हैं। आचार्य जी के साहित्य का स्वाध्याय (Self-study) करना हर उस व्यक्ति के लिए अनिवार्य है जो प्राकृतिक चिकित्सा और भारतीय संस्कृति में विश्वास रखता है।"आचार्य बालकृष्ण जी का साहित्य पढ़ने का अर्थ है—अपने शरीर, मन और स्वास्थ्य को गहराई से समझना।" यदि आप अपने जीवन में पूर्ण स्वास्थ्य और वैचारिक स्पष्टता चाहते हैं, तो आचार्य बालकृष्ण जी की पुस्तकों को अपने पुस्तकालय का हिस्सा अवश्य बनाएँ। उनकी पुस्तकें न केवल ज्ञान का भंडार हैं, बल्कि एक स्वस्थ राष्ट्र के निर्माण का आधार भी हैं।

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